मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लाखों-करोड़ों लोग इससे जुड़े हैं। यह लोगों के रोजगार का साधन है।
राज्य सरकार बड़े उद्योगों को आकर्षित करने के साथ-साथ एमएसएमई को बढ़ावा देने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है। काफी कुछ किया और आगे भी करेंगे। सरकार की कोशिश उद्यमियों को ज्यादा से ज्यादा सहूलियतें मुहैया कराने की है, ताकि लघु उद्योग फल-फूल सकें।
सरकार ने बहुत से परंपरागत छोटे उद्योगों को वैट में छूट दी है। बीते साढ़े तीन साल में इंडस्ट्रियल फ्रेंडली माहौल बनाने की दिशा में काम किया है। इसी का नतीजा है कि बड़ी संख्या में इन्वेस्टर सूबे में निवेश के लिए आ रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि कुछ जगह इन्फ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतें हैं, पर इसे भी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। एमएसएमई के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने अमर उजाला से विस्तार से बात की।
यूपी में एमएसएमई की क्या संभावनाएं देखते हैं?
अखिलेश : पूरे देश में सबसे ज्यादा एमएसएमई यूपी में हैं। यह हमारे आर्थिक विकास का आधार है। इनसे सरकार को टैक्स मिलता है जिससे लोगों की भलाई के लिए हम योजनाएं चलाते हैं। एमएसएमई को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा एमएसएमई स्थापित हों, इसके लिए हम पूरी तत्परता से प्रयास कर रहे हैं।
जितने ज्यादा उद्योग लगेंगे, हमारी अर्थव्यवस्था उतनी ही मजबूत होगी। इनके विकास के लिए हमारी सरकार तेजी से काम करेगी। फूड प्रोसेसिंग, इत्र उद्योग, डेयरी, हस्तशिल्प में काफी संभावनाएं हैं। इन्हें आगे बढ़ाने के लिए सरकार काम कर रही है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर परंपरागत उद्योगों को भी सरकार प्रोत्साहित कर रही है।
उद्यमियों की इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर शिकायत रहती है। सरकार इस दिशा में क्या कर रही है?
अखिलेश : हमारा ध्यान इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट पर भी है। खास तौर पर ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने पर जोर है, जिससे ज्यादा से ज्यादा उद्यमी उद्योग स्थापित करें। इसके लिए अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास नीति बनाई गई है।
साथ ही बिजली, सड़क, सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों का समुचित विकास कराने के साथ-साथ कुछ औद्योगिक क्षेत्रों को मॉडल के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। आने वाले दिनों काफी सुधार दिखाई देगा।
आपकी सरकार का औद्योगीकरण पर काफी जोर रहा है। साढ़े तीन साल में सरकार के प्रयास कितने कारगर साबित हुए हैं?
अखिलेश : मार्च, 2012 में जब समाजवादी सरकार सत्ता में आई, तब के वातावरण की अगर मौजूदा माहौल से तुलना की जाए तो जमीन-आसमान का फर्क नजर आएगा। आज स्थिति यह है कि सूबा औद्योगीकरण की दिशा में न केवल तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि कारोबारी नजरिए से देश के पहले 10 प्रदेशों में शामिल कर लिया गया है। यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि वर्ल्ड बैंक की ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ रिपोर्ट में कहा गया है।