राज्य वेतन समिति के नवनियुक्त अध्यक्ष और 1978 बैच के अवकाश प्राप्त आईएएस अधिकारी गोपबंधु पटनायक आईएएस एसोसिएशन के सचिव रहे हैं।
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एक काडर के जिम्मेदार पदाधिकारी रहने के नाते उन्हें यह अच्छी तरह पता है कि किसी काडर के कार्मिकों की सरकार से किस-किस तरह की अपेक्षाएं होती हैं।
केंद्र व राज्य शासन में कई अहम पदों पर रह चुके पटनायक को यह भी पता है कि सरकार की सीमाएं क्या होती हैं? करीब 35 साल की लंबी प्रशासनिक सेवा से 2013 में रिटायर होने से पहले वह पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन, ऊर्जा और कृषि जैसे अहम विभागों के प्रमुख सचिव, गृह विभाग के सचिव के अलावा लंबे समय तक राज्यपाल के प्रमुख सचिव रहे हैं।
रिटायरमेंट के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति की भी जिम्मेदारी निभाई। अब राज्य वेतन समिति का चेयरमैन नियुक्त हो जाने से सूबे के 21 लाख से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदें उन पर टिक गई हैं। ‘अमर उजाला’ ने नई जिम्मेदारी को लेकर पटनायक से लंबी बात की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश:
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'कर्मचारियों की अपेक्षाओं को पूरा करने की होगी कोशिश'
- फोटो : amar ujala
सवाल- वेतन समिति के चेयरमैन के नाते कर्मचारी वर्ग की आपसे बड़ी अपेक्षाएं हैं। नई जिम्मेदारी को किस तरह लेते हैं?
जवाब - सरकार ने वेतन समिति का गठन करते समय उसकी सीमाएं भी तय की हैं। समिति को राज्य की आर्थिक स्थिति, संसाधन, वित्तीय क्षमता व अन्य प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रख सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों पर केंद्र के निर्णय को देखते हुए अपनी सिफारिशें देनी हैं। समिति अपनी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की अपेक्षाओं में पूरा समन्वय बैठाने का प्रयास करेगी।
सवाल- सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों से कर्मचारियों में काफी नाराजगी सामने आ रही है। क्या समिति के लिए यह चुनौती की तरह नहीं है?
जवाब- राज्य के संसाधन और कर्मचारियों की अपेक्षा में तालमेल बैठाना ही समिति की सबसे बड़ी चुनौती होती है। मगर, मुझे पूरा विश्वास है कि कर्मचारियों को साथ लेकर इस चुनौती से निपटा जा सकता है।
'समिति वही काम कर रही है जो सरकार ने सौंपे हैं'
सवाल- प्रदेश में कई सरकारी संस्थाएं हैं जहां अब भी चौथे व पांचवें वेतन आयोग की संस्तुतियां लागू हैं। क्या उनके बारे में भी समिति गौर करेगी?
जवाब- यदि सरकार ऐसी संस्थाओं की स्थिति का अध्ययन कर सिफारिशें देने को कहेगी, तो देखा जाएगा। समिति वही काम कर सकती है जो राज्य सरकार उसे सौंपे।
प्रश्न - सरकार ने वेतन समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का वक्त दिया है। पिछली वेतन समिति ने अपना काम पूरा करने में तीन साल लिया था। क्या इतने कम समय में रिपोर्ट सौंप देंगे?
जवाब - सातवें वेतन आयोग का लाभ कर्मियों को जल्द से जल्द मिले इसके लिए समिति तय समय में काम पूरा करने का प्रयास करेगी। सभी के सहयोग से समय के भीतर यह काम पूरा किया जा सकता है।
सवाल - छठें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद तमाम संवर्ग की वेतन विसंगतियां सामने आई हैं। मुख्य सचिव समिति ने कई मामलों को आपकी समिति के गठन की प्रत्याशा में ही संदर्भित कर दिया था। क्या समिति को वे काम भी सौंपे गए हैं।
जवाब - वैसे राज्य सरकार विसंगति समिति अलग से बना सकती है। यदि सरकार वह जिम्मेदारी सौंपेगी तो उसे भी देखूंगा। वेतन समिति का गठन हो गया है। अब धीरे-धीरे सभी चीजें स्पष्ट हो जाएंगी।
सवाल - समिति क्या सरकारी कामकाज की गुणवत्ता और राज्य कर्मचारियों की परफॉरमेंस पर भी गौर करेगी?
जवाब - एक लोककल्याणकारी राज्य के रूप में जहां सरकार की यह जिम्मेदारी है कि समय-समय पर अपने कर्मचारियों के हितों पर गौर करे वहीं राज्य हित में कर्मचारियों की दक्षता और कार्यकुशलता बढ़ाना जरूरी है। कर्मचारी राज्य की प्रगति में इंस्ट्रूमेंट की तरह काम करते हैं। इंस्ट्रूमेंट अच्छी तरह काम करे इसके लिए उन्हें नई तकनीक से परिचित और समय-समय पर प्रशिक्षित करना चाहिए। 20 साल पहले जब कंप्यूटर तकनीक आई तब तमाम लोग उसे लेकर सहज नहीं थे। धीरे-धीरे उन्हें इसके लिए तैयार किया गया। अब वे काम कर रहे हैं।
गवर्नेंस में आईटी तकनीक तेजी से स्थान ले रही है। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण देकर तैयार करना होगा। कर्मियों को अवसर उपलब्ध कराके मानसिकता और दक्षता में बदलाव लाया जा सकता है। कामकाज की गुणवत्ता और परफॉरमेंस दोनों आईटी की मदद से सुधर सकता है।
सवाल- कई संवर्ग ऐसे हैं जहां कर्मचारियों को पदोन्नति के अवसर तक नहीं हैं। एक ही पद पर काम करते हुए रिटायर होने को मजबूर हैं। क्या वेतन समिति इसे संज्ञान में लेगी?
जवाब- आज तमाम कर्मी मल्टीटास्किंग जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं। चपरासी की नौकरी में उच्च शिक्षित व्यक्ति आ रहे हैं। इनकी प्रतिभा के बेहतर उपयोग के लिए उचित अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए रास्ते निकाले जाने चाहिए। मेरा मानना है कि आपके कर्मचारी खुश हैं तो प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। नाखुश हैं तो काम पर असर पड़ेगा। समिति अपनी सीमा में रहते हुए इस बात को ध्यान में रखेगी।