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ऑनलाइन ठगी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश, एसटीएफ ने तीन को किया गिरफ्तार

Mon, 04 Nov 2019 01:52 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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राकेश, प्रदीप, बिट्टू - फोटो : अमर उजाला
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यूपी एसटीएफ ने ऑनलाइन ठगी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश कर रविवार को राजधानी से तीन शातिरों को दबोचा है। यह गिरोह विदेशों में नौकरी पाने की चाह रखने वालों से ठगी कर लाखों रुपये भारतीय खातों में जमा कराते थे।
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फिर अपने एजेंट के जरिए इस रकम को अपने बिट क्वॉइन वैलेट में जमा करा लेते थे। एसटीएफ के एसएसपी राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि गिरोह के तीन शातिरों राकेश, बिट्टू यादव और प्रदीप देव को चिनहट से दबोचा गया।

मूल रूप से बिहार के रहने वाले तीनों शातिर ठगी का कारोबार बढ़ाने के लिए लखनऊ में अपने ग्राहक ढूंढ रहे थे। यह गिरोह वेब पोर्टल पर विदेशों में नौकरी का विज्ञापन देकर लोगों को फंसाता था।
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तीनों के पास से 16 एटीएम कार्ड और 21 हजार रुपये बरामद किए गए हैं। ठगों ने महज 4 माह में ही 40 लाख रुपये ठग लिए थे। 
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यूएस, ऑस्ट्रेलिया से यूरोप तक जुड़ा था ठगी का नेटवर्क 

प्रतीकात्मक तस्वीर
यूपी एसटीएफ ने लखनऊ से जिन तीन शातिरों को गिरफ्तार कर बिट क्वाइन से ऑनलाइन ठगी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा किया है, वे बिहार से नेटवर्क चला रहे थे।

एसटीएफ के एसएसपी राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि फर्जी पोर्टल पर विदेशों में नौकरी का विज्ञापन देकर लोगों से ठगी करने की सूचनाएं मिल रही थीं। इसी क्रम में सर्विलांस के दौरान बिहार से नेटवर्क संचालित कर रहे राकेश, बिट्टू यादव और प्रदीप देव का पता चला।

राकेश इंग्लिश का अच्छा जानकार है और वह दिल्ली में आईटी का स्टूडेंट है। बिट्टू और प्रदीप उसके सहयोगी हैं। एसटीएफ ने दावा किया है कि  इस ऑनलाइन ठगी के तार कैमरून, ऑस्ट्रेलिया, यूएस और यूरोप देशों से भी जुड़े हुए हैं।

एसटीएफ का दावा है कि बिहार व कुछ अन्य राज्यों में विदेशों में बैठे स्कैमर के पिकर हैं। साथ ही नेपाल के भी कुछ पिकर के बारे में जानकारी हुई है।

राजद की सरकार में कराता था ट्रांसफर-पोस्टिंग

प्रतीकात्मक तस्वीर
एसटीएफ द्वारा पकड़ा गया प्रदीप देव बिहार में राष्ट्रीय जनता दल का नेता बताया जा रहा है। पूछताछ में प्रदीप ने एसटीएफ के अधिकारियों को बताया कि वह बिहार में राजद की सरकार के दौरान ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए अफसरों की दलाली करता था।

लगभग तीन महीने पहले वह राकेश के संपर्क में आया और वह ऑनलाइन ठगी के कारोबार में लिप्त हो गया। प्रदीप के खिलाफ बिहार के सीतामढ़ी जिले में धोखाधड़ी और फ्रॉड की एफआईआर भी दर्ज है।

पिकर की तलाश में आए थे लखनऊ
एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक सत्यसेन यादव के मुताबिक पकड़े गए युवक नए पिकर की तलाश में लखनऊ आए थे, जहां उन्हें दबोच लिया गया।

ठगी के तीन किरदार

प्रतीकात्मक तस्वीर
स्कैमर
विदेश में बैठा युवक (स्कैमर) ठगी की पूरी प्लानिंग करता है। वह विदेशों में नौकरी दिलाने की फर्जी वेबसाइट बनाता है और इसके विज्ञापन फेसबुक पर देता है।

साथ ही भारत में अपने ‘पिकर’ बनाता है, जिसका काम अधिक से अधिक बैंकों में खाते खुलवाकर उसकी डिटेल उपलब्ध कराना होता है। इसके बदले स्कैमर खातों में जमा कराई गई रकम का 25 प्रतिशत कमीशन पिकर को देता है।

जैसे ही पोर्टल पर आवेदन आता है, उससे नौकरी के लिए पैसों की मांग की जाती है। पैसा जमा करने के लिए राजी युवक को पिकर द्वारा उपलब्ध कराए गए खातों की डिटेल दे दी जाती है और उस खाते में पैसे जमा हो जाते हैं।
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बिट क्वाइन वेंडर मुरादाबाद से चला रहा कारोबार

प्रतीकात्मक तस्वीर
पिकर
पिकर गरीब युवकों को सरकारी योजना की राशि बैंक में आने का लालच देकर बैंकों में खाते खुलवाता है और खाते में पैसे आने पर 12 प्रतिशत खाता धारक को देने का वादा करता है।

यह कमीशन वह अपने 25 प्रतिशत के हिस्से से देता है। बाकी 75 प्रतिशत रकम पिकर द्वारा ‘बिटक्वाइन वेंडर’ को उपलब्ध करा दी जाती है। फिलहाल ज्यादातर खाते बिहार में ही खोले जाने की जानकारी मिली है।

बिट क्वाइन वेंडर
बिटक्वाइन वेंडर उपलब्ध रकम को अपने हिस्से का कमीशन काटकर विदेश में बैठे स्कैमर के बिट क्वाइन वैलेट में जमा कर देता है। बताया जा रहा है कि  बिट क्वाइन वेंडर मुरादाबाद से अपना कारोबार चला रहा है। 
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