न जनता को राहत न विकास की तस्वीर। यही लब्बोलुआब है मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से शुक्रवार को विधानसभा में पेश किए गए वर्ष 2014-15 के अंतरिम बजट और लेखानुदान का।
मुख्यमंत्री के बजट भाषण में न तो जनता की चिंता दिखी और न ही विकास की दृष्टि। मुख्यमंत्री अखिलेश ने 2014-15 का 2.60 लाख करोड़ का अंतरिम बजट पेश किया।
सरकार ने विधानमंडल में अगले वित्तीय वर्ष के पहले चार महीने के लिए 93,502 करोड़ रुपये की लेखानुदान मांगे पेश की और ध्वनिमत से पारित भी करा लिया।
सदन द्वारा मंजूर की गई लेखानुदान की राशि किसी ‘नई सेवा’ पर खर्च नहीं की जाएगी। यानी जनता को कोई राहत देने व विकास योजनाओं को लेकर सरकार की ओर से फिलहाल कोई पहल नहीं होने जा रही है।
अपने अति संक्षिप्त चार पन्नों के भाषण में मुख्यमंत्री ने किसी भी योजना या सरकार की ओर से की गई पहल का जिक्र नहीं किया।
सदन ने पूछा आखिर पूर्ण बजट क्यों नहीं
बजट के बजाय लेखानुदान पेश करने पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होने लगे हैं। यह मामला शुक्रवार को विधान परिषद में भी उठ गया। भाजपा के हृदय नारायण दीक्षित ने इस पर औचित्य का सवाल उठा दिया।
पूछा कि प्रदेश में कौन सी ऐसी विशेष परिस्थितियां आ गई हैं, जिनके कारण सरकार पूरा बजट लाने के बजाय लेखानुदान आई है। प्रदेश को संपूर्ण बजट से वंचित करना असंवैधानिक है। इससे देश में एक गलत परंपरा पड़ने का खतरा खड़ा हो गया है।