अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण ने सिर्फ धार्मिकता को ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय टूरिज्म सेक्टर को भी नई दिशा दी है। श्रीलंका टूरिज्म प्रमोशन ब्यूरो और श्रीलंका कन्वेंशन ब्यूरो ने सोमवार को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एक फाइव स्टार होटल में बीटूबी नेटवर्किंग रोड शो आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश में पर्यटन के बाजार की संभावनाएं तलाशना और भारत-श्रीलंका पर्यटन सहयोग को बढ़ाना रहा।
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भारत से श्रीलंका जाने वाले पर्यटकों में यूपी का 25 फीसदी हिस्सा
कार्यक्रम में ब्यूरो की सहायक निदेशक शिरानी हेरथ ने बताया कि जनवरी से मई 2025 तक श्रीलंका में कुल 10,29,803 पर्यटक पहुंचे। इनमें से 2,04,060 भारतीय थे। यानी कुल पर्यटकों का 20% हिस्सा भारत से आया। इस आंकड़े में अकेले उत्तर प्रदेश का योगदान 25 फीसदी है। उन्होंने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद से यूपी से श्रीलंका जाने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ये धार्मिक और सांस्कृतिक टूरिज्म को नई ऊंचाई दे रहा है।
बुद्ध सर्किट और राम पथ बन रहे ब्रिज टू श्रीलंका
ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीएएआई) की यूपी चेयरपर्सन हीना जैदी ने बताया कि यूपी से हर साल 10,000 से अधिक सैलानी श्रीलंका जाते हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि यहां रामपथ और बुद्ध सर्किट दोनों ही श्रीलंका से जुड़े हुए हैं। ट्रैवल ऑपरेटर सुनील बी सत्यवक्ता के मुताबिक अयोध्या आने वाले विदेशी पर्यटक अब श्रीलंका की यात्रा को भी अपने शेड्यूल में जोड़ने लगे हैं। इससे दोनों देशों के धार्मिक पर्यटन को काफी लाभ हुआ है।
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कार्यक्रम में श्रीलंका के पर्यटन मंत्री विजीथा हेराथ और उप मंत्री प्रो. रुवान रणसिंघे समेत पर्यटन क्षेत्र से जुड़े 35 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। बीटूबी इवेंट में उत्तर भारत के 200 से अधिक ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटरों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में श्रीलंका के पारंपरिक सबरगमों नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति हुई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।