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हादसे में अपनों की जान जाने पर पुलिस से जरूर भरवाएं फॉर्म 54, इंश्योरेंस क्लेम का ऐसे मिलेगा लाभ

Mon, 11 Dec 2017 04:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेमो फोटो
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सड़क हादसों में रोजाना प्रदेशभर में सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है। इस कारण कई परिवारों को जिंदगीभर के लिए दो वक्त की रोटी के लाले पड़ जाते हैं। यह सब सिर्फ पुलिस की एक चूक के कारण होता है। सड़क हादसों के ज्यादातर मामलों में पुलिस विवेचना के दौरान फॉर्म-54 नहीं भरती। इस कारण पीड़ित परिवारीजनों को इंश्योरेंस क्लेम नहीं मिल पाता।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई में अब इस फॉर्म को भरना अनिवार्य कर दिया। शासन से इसकी रिपोर्ट भी तलब किए जाने के बाद हरकत में आई पुलिस ने इस फॉर्म को भरना शुरू कर दिया है। इससे संभावना बढ़ गई है कि पीड़ित परिवारीजनों को अब सहारा मिलेगा।

सड़क हादसों के वक्त पुलिस मृतक का पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम भेजकर पल्ला झाड़ लेती है। इस तरह के मामलों की विवेचना में भी पुलिस का रवैया लापरवाही भरा रहता है। इस कारण पीड़ित परिवारों को लाभ नहीं मिलता। हाल में ही सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। इसमें कई बिन्दुओं पर पुलिस की ओर से लापरवाही करने का आरोप लगाया गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार से सड़क हादसों की रिपोर्ट मांगी। इसमें हादसों की संख्या, इंश्योरेंस क्लेम की डिटेल, हादसों में फॉर्म-54 की स्थिति, हादसों में गाड़ियों की स्थिति सहित कई बिन्दुओं पर जानकारी मांगी। इसके बाद शासन ने रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी पुलिस विभाग को सौंपी।

दो महीनों से थानावार फॉर्म-54 भरने का सिलसिला शुरू किया। कुछ फॉर्म भरकर जमा किए गए। पुलिस अधिकारियों ने कुछ थानेदारों को लापरवाही बरतने पर फटकार भी लगाई। आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में महज 30 से 35 फीसदी फॉर्म ही भरे गए हैं।
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इसलिए जरूरी है फार्म-54

सड़क हादसों में पीड़ित परिवार की तहरीर पर केस दर्ज करने के बाद ज्यादातर मामलों में पुलिस हाथ खड़े कर लेती है। विवेचना के नाम पर कोरम पूरा कर दिया जाता है। इस कारण हादसों के केस में कई सालों तक पीड़ित पक्ष को लाभ नहीं मिल पाता। पुलिस विवेचना के बाद चार्जशीट के साथ फॉर्म-54 नहीं लगाती तो क्लेम लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

कोर्ट बिना फॉर्म-54 के कोई इंश्योरेंस क्लेम नहीं दे सकती है। इसका फायदा हादसा करने वाले पक्ष और बीमा कंपनियों को मिलता है। ऐसे कई मामलों में दोनों पक्षों के बीच मामूली धनराशि पर कोर्ट के बाहर समझौता हो जाता है।

ये है फॉर्म-54
सड़क हादसों में फॉर्म-54 विवेचक द्वारा भरा जाता है। इसमें हादसे के शिकार व्यक्ति की पूरी जानकारी, परिवार का ब्योरा, आश्रितों की संख्या, मौत के समय उम्र और जिम्मेदारी, आर्थिक स्थिति की जानकारी भरी जाती है। हादसे में प्रयुक्त वाहन की डिटेल, गाड़ी का नंबर, बीमा, चालक का लाइसेंस व अन्य जानकारी भी इसी फॉर्म में भरी जाती है। यह फॉर्म हादसे की चार्जशीट के साथ कोर्ट में जमा किया जाता है। इसके आधार पर कोर्ट द्वारा पीड़ित परिवार को इंश्योरेंस क्लेम दिया जाता है।

फटकार के बाद हरकत में आई पुलिस
हादसों में मरने वाले और घायलों को इंश्योरेंस क्लेम दिलाने के मामले में पुलिसिया लापरवाही कोर्ट के सामने आई। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए फटकार लगाई। शासन से रिपोर्ट मांगी तो विभागीय अधिकारियों के पेंच कसे जाने लगे। अगस्त से फॉर्म-54 भरने की कार्रवाई तेज की गई। राजधानी के 42 थानों में करीब 9500 हादसों के मामले लंबित थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक करीब छह हजार फॉर्म-54 भेजे जा चुके हैं। अभी भी करीब चार हजार लंबित हैं।
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