कहते हैं अपराधी चाहें जितना चालाक हो, कोई न कोई सबूत जरूर छोड़ जाता है। ऋतु हत्याकांड की तफ्तीश भी कुछ इसी अंदाज में हुई।
पुलिस ने विशेषज्ञों की राय के साथ विभिन्न बिंदुओं पर पड़ताल करके सबूत जुटाए। इसके साथ विश्व में इंसुलिन से हत्या के 14 केसों की स्टडी के बाद डॉ. अवध कपूर को गिरफ्तार किया।
इंस्पेक्टर हजरतगंज अशोक कुमार वर्मा का कहना है कि ऋतु की हत्या का मामला 22 फरवरी को उसकी चचेरी बहन नीता खन्ना की तरफ से दर्ज किया गया।
तत्कालीन विवेचक केके मिश्रा ने कृष्णा मेडिकल सेंटर के स्टाफ से तहकीकात की। इसके बाद तफ्तीश उन्हें सौंप दी गई। उन्होंने केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग से मिली रिपोर्ट पर राज्य चिकित्सा विधि विशेषज्ञ से राय मांगी।
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि ऋतु के शरीर में इंसुलिन की मात्रा 25 के मुकाबले 285.10 यूआईयू/एमएल पाई गई जो प्राकृतिक रूप से शरीर में बनना संभव नहीं है।
विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ऋतु को इंसुलिन की अत्याधिक मात्रा बाहर से दी गई। इससे हाईपोग्लैशिमिया के कारण उसे हार्टअटैक हुआ और मौत हो गई।
इस रिपोर्ट के आधार पर इंस्पेक्टर अशोक कुमार वर्मा ने कृष्णा नर्सिंगहोम के स्टाफ से तहकीकात की। डॉक्टर व नर्स से पता चला कि ऋतु की जांच में पल्स, ब्लडप्रेशर, हीमोग्लोबिन आदि सामान्य था।
ऋतु ने शाम को हल्का भोजन किया। उसे मधुमेह की भी शिकायत नहीं थी। अस्पताल स्टाफ ने बताया कि 23 मई 12 की रात डॉ. अवध कपूर अपनी पत्नी की तीमारदारी के लिए अस्पताल में रुके थे।
उन्होंने 24 मई की सुबह छह बजे नर्स को ऋतु की हालत बिगड़ने की सूचना दी। नर्स ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर को बुलाया। इस बीच ऋतु की मौत हो चुकी थी।
खास बात है कि पत्नी को हृदयाघात पर उसे कार्डियक मसाज देने के बजाय डॉ. अवध कपूर अलग खड़े रहे। पड़ताल में स्पष्ट हुआ कि तीमारदारी के बहाने रात को रुके डॉ अवध कपूर ने अपनी पत्नी को बाहर से इंसुलिन दिया।
इसके साथ पुलिस ने डॉ. अवध कपूर के ट्विटर अकाउंट की जांच की। उसका 12 फरवरी का ट्विट खटका। इसमें उसने इंसुलिन थेरेपी के अध्ययन का जिक्र किया था।
इसके बाद ऋतु की मौत के दूसरे दिन 25 मई व उसके बाद के ट्विट्स ने साबित किया कि डॉ. अवध कपूर को अपनी पत्नी की मौत का कोई गम नहीं है। इसके साथ पुलिस ने अन्य सबूत जुटाए और डॉ अवध कपूर को गिरफ्तार कर लिया।
सौ यूनिट इंसुलिन से मौत तय
इंसुलिन की डोज शरीर में शुगर की मात्र को नियंत्रित करने के लिए दी जाती है। सामान्य स्थिति में मधुमेह से पीड़ित को अधिकतम 20 से 25 यूनिट तक ही इंसुलिन डोज दी जाती है।
इसे भी चिकित्सक सबक्यूटेनिका तकनीक (खाल के अंदर) से देते हैं जो धीरे धीरे शरीर में जाता है। अगर किसी व्यक्ति को अचानक सौ यूनिट इंसुलिन जोड़ शरीर में दे दी जाए तो उसकी मौत तय है।
अगर कहीं यह इंसुलिन इंट्राविनस (नस के माध्यम) से शरीर में पहुंचाया जाता है तो सौ यूनिट से कम पर भी पीड़ित की मौत संभव है क्यों कि शरीर में इंसुलिन की ओवरडोज पहुंचते ही हाइपोग्लाइसीमिया ( शरीर से शुगर गायब) हो जाता है।
डा. संजीब बिस्वास
वरिष्ठ सर्जन
पीएमएस संवर्ग