बेशक वो ये रंग-बिरंगी दुनिया नहीं देख सकती है लेकिन सुरों को पहचानने में वो भूल नहीं करती। राजधानी की बेहतरीन गायिका शबीना जब दो वर्ष की थी तभी तेज बुखार आने पर उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई।
स्कूल की पढ़ाई भी नहीं कर सकी। छोटी उम्र में ही गाना शुरू कर दिया और उस्ताद गुलशन भारती से गायिकी के गुर सीखे। 2012 में आकाशवाणी में ऑडिशन दिया और पास हो गई।
परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बावजूद शबीना ने हिम्मत नहीं हारी। कई पुरस्कार जीते, अब वह खुद एक म्यूजिक टीचर है और बच्चों को संगीत सिखाती है।
2018 में तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने शबीना को सम्मानित किया और फिर दिसंबर 2019 में उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी सम्मानित किया।
शबीना कहती है कि हाल में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा सम्मान व उनके साथ चाय पीने का लम्हा मेरे लिए अब तक का सबसे खास लम्हा रहा। शबीना उन लोगों के लिए एक नजरी है जो हालात को कोसकर हिम्मत हार जाते हैं।