लखनऊ के लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने रविवार सुबह गर्भवती और गर्भस्थ शिशु की जान ले ली। इस खबर के बाद मंत्री सिद्धार्थ सिंह सोमवार को लोहिया अस्पताल के निरीक्षण के लिए पहुंचे। वहां व्यवस्थाओं को लेकर स्टाफ की फटकार लगाई साथ ही कल रात वाली घटना के लिए सीनियर डॉक्टरों से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, ये घटना बहुत दर्दनाक है। अगर आप लोगों से काम नहीं हो रहा तो बता दीजिए, सरकारी अस्पताल बंद करवा दिए जाएं लोगों को प्राइवेट से इलाज करवाने की सुविधा दी जाए।
बता दें कि देर रात प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल पहुंची गर्भवती को इमरजेंसी में तैनात महिला डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाकर दो घंटे तक कुर्सी पर बैठा दिया।
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इसके बाद हालत सामान्य बताकर घर भेज दिया। सुबह दर्द तेज हुआ और हालत बिगड़ी तो परिवारीजन ऑटो से लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे जहां इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिवारीजनों ने डॉक्टराें पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। सीतापुर, रामपुर के नसीरूद्दीन गर्भवती पत्नी कलीमु (24) के साथ गोमतीनगर के ग्वारी गांव में रहते हैं।
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शनिवार रात करीब साढ़े दस बजे कलीमु को प्रसव पीड़ा होने लगी। नसीरूद्दीन ने बताया कि आशा बहू अनीता यादव ने 102 एंबुलेंस की मदद से रात करीब 11 बजे कलीमु को अस्पताल पहुंचाया। वहां महिला डॉक्टर ने मरीज को देखे बिना ही कह दिया कि अभी प्रसव का समय नहीं हुआ है।
उसने एक इंजेक्शन लगा दिया और कुर्सी पर बैठा दिया। रात एक बजे डॉक्टर ने कहा कि अब दर्द नहीं है मरीज को ले जाओ। सुबह परेशानी हो तो ओपीडी में दिखवा लेना। नसीरूद्दीन ने बताया कि रविवार सुबह करीब सवा दस बजे कलीमु को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी।
डॉक्टरों के आगे गिड़गिड़ाए परिवारीजन
कलीमु की मौत पर परेशान परिवारीजन
- फोटो : amar ujala
आशा बहु अनीता यादव की मदद से कलीमु को ऑटो से अस्पताल लेकर पहुंचे तो करीब 11 बजे इमरजेंसी में मौजूद महिला डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। नसीरूद्दीन का आरोप था कि महिला डॉक्टरों ने रात के समय ही इलाज किया होता तो जान न जाती।
रात को ऑपरेशन या प्रसव कराने से बचने के लिए महिला डॉक्टर ने आधे अधूरे इलाज के बाद भगा दिया। इमरजेंसी में हंगामा और बवाल की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे अस्पताल के गार्डों ने मामला शांत कराया।
परिवारीजन हदीशुन ने हदीशुन ने बताया कि डॉक्टर को रात में बताया था कि इससे पहले भी एक बच्चा मर चुका है। इस पर डॉक्टर ने कह दिया दो महीने पहले बुखार आया तो ये जरूरी नहीं की दो महीने बाद भी बुखार होगा। चलो जाओ यहां से। ज्यादा जल्दी है तो कहीं और दिखवा लेना। नसीरूद्दीन का आरोप था कि डॉक्टर ने लापरवाही नहीं उसने हत्या की है।
सवाल : अल्ट्रासाउंड क्यों नहीं कराया, क्यों दिया दर्द का इंजेक्शन ?
इस मामले में एक महिला रोग विशेषज्ञ बताती हैं कि प्रसव पीड़ा होने पर इंजेक्शन नहीं दिया जाता है। ऐसा करने से प्रसव नहीं हो पाएगा। इसके साथ ही डॉक्टर को सबसे पहले अल्ट्रासाउंड जांच करवानी चाहिए थी, जिससे पेट में बच्चे की स्थिति पता चल सके। इस केस में दर्द रोकने का इंजेक्शन दे दिया जिससे मरीज की हालत बिगड़ी और जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। समय रहते सामान्य प्रसव या ऑपरेशन किया गया होता तो ये घटना सामने नहीं आती।
रिकॉर्ड खोलेगा पूरा राज
कलीमु को मौत पर दुःखी परिवारीजन
- फोटो : amar ujala
परिवारीजनों हदीशुन का आरोप था कि रात को महिला डॉक्टर ने बताया था कि बेड खाली नहीं है। जबकि उस समय इमरजेंसी में सात बेड खाली थे। इसपर तीमारदारों ने डॉक्टर को बताया कि बेड नंबर 22,23,24,25,26,27,28 खाली है तो डॉक्टर ने कह दिया कि वो बेड मेरा नहीं है।
जिसके नाम से बेड रिजर्व है आज उनकी ड्यूटी नहीं है। लोहिया अस्पताल में कहने को मरीजों को किसी तरह की असुविधा से बचाने के लिए कुल पांच अफसरों की टीम है। इसमें अस्पताल के निदेशक डॉ. डीएस नेगी, सीएमएस डॉ. ओंकार यादव, एमएस डॉ. एमएल भार्गव, महिला विंग की सीएमएस डॉ. लिलि सिंह और एमएस डॉ. सरिता सक्सेना की टीम है।
डॉक्टरों की मनमानी और लापरवाही का पुलिंदा 102 एंबुलेंस सेवा के रिकॉर्ड और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज से खुलेगा। सूत्रों की मानें तो अब अस्पताल के डॉक्टर व अधिकारी 102 एंबुलेंस सेवा के रिकॉर्ड में भी छेड़छाड़ की तैयारी में होंगे क्योंकि अस्पताल में तैनात महिला डॉक्टरों की पहुंच शासन तक में है। अस्पताल में तैनात अधिकतर महिला डॉक्टरों के पति भी अस्पताल में है जो अपनी पहुंच के दम पर अस्पताल में लंबे समय से जमे हुए हैं।
डॉक्टरों की मनमानी और लापरवाही का पुलिंदा 102 एंबुलेंस सेवा के रिकॉर्ड और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज से खुलेगा। सूत्रों की मानें तो अब अस्पताल के डॉक्टर व अधिकारी 102 एंबुलेंस सेवा के रिकॉर्ड में भी छेड़छाड़ की तैयारी में होंगे क्योंकि अस्पताल में तैनात महिला डॉक्टरों की पहुंच शासन तक में है। अस्पताल में तैनात अधिकतर महिला डॉक्टरों के पति भी अस्पताल में है जो अपनी पहुंच के दम पर अस्पताल में लंबे समय से जमे हुए हैं।
पति नसीरूद्दीन और आशा बहू अनीता यादव का आरोप है कि रात के समय ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर ने क्या इलाज किया और क्या इंजेक्शन लगाया इसकी कोई पर्ची तक नहीं दी।
डॉक्टर से पर्ची मांगी को कह दिया कि पर्ची के चक्कर में पूरे रजिस्टर में एंट्री करनी पड़ेगी। वहीं सूत्रों की मानें तो महिला डॉक्टर ने रात के समय जानबूझकर मरीज की इमरजेंसी रिकॉर्ड में एंट्री नहीं की जिससे किसी को पता न चले कि मरीज आया था और वापस किया गया। वहीं अब एक डॉक्टर बताती हैं कि अब रजिस्टर को बैक डेट में मेंटेन कर दिया जाएगा, जिससे डॉक्टर को बचाया जा सके।
‘रात में बेड खाली होने के बाद भी मरीज को लौटाया गया तो ये गंभीर मामला है। इस मामले में ड्यूटी पर तैनात डॉ. शालू महेश ने बताया कि उन्होंने इस तरह का कोई मरीज नहीं देख जबकि डॉ. शुभ्रा का फोन बंद आ रहा है। इमरजेंसी रजिस्टर में रिकॉर्ड चेक किया जाएगा। मरीज को लाने वाले परिवारीजन व आशा बहु से भी पूछताछ होगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।’ -डॉ. लिलि सिंह, सीएमएस, लोहिया महिला अस्पताल