बाद में ऐसे ही फर्जीवाड़े के मामले में एटीएस ने वाराणसी से भी कुछ जालसाजों को दबोचा था। एटीएस के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं देश की सुरक्षा के साथ बड़ा खतरा साबित हो सकती हैं। क्योंकि फर्जी दस्तावेजों से सेना में भर्ती हो रहे जवान न सिर्फ सेना से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, बल्कि यह देश के किसी भी कैंटोनमेंट या संवेदनशील स्थानों पर आसानी से पहुंच सकते हैं जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।
सूत्रों का कहना है कि सिर्फ 29 ही सैनिक नहीं, बल्कि लखनऊ और वाराणसी में मिलाकर बड़ी संख्या में ऐसे सैनिक हैं जिनकी भर्ती फर्जी दस्तावेजों से हो गई है। सेना के अधिकारी भी इस फर्जीवाड़े को नहीं पकड़ पाए जबकि सेना में भर्ती से पहले अभ्यर्थी के पते का सत्यापन कराने के साथ ही एलआईयू रिपोर्ट भी ली जाती है। एसे में सेना के अधिकारियों से लेकर वेरिफिकेशन करने वाले एलआईयू के अफसरों पर भी सवाल उठे, जिनका जवाब अब तक नहीं मिल सका है।
फर्जी दस्तावेज से भर्ती होने वाले जिन 29 सैनिकों का जिक्र एफआईआर में किया गया था, उनमें अमित थापा, भानु प्रताप राय, बिसेन बुधा, अमित सिंह राना, भानू प्रताप सिंह, नारायण सिंह, मनीष कुमार शर्मा, निर्मल गुरूंग, त्रिभुवन, देवनाथ, करन सिंह, प्रद्युम्न सिंह, अभिमन्यु सिंह, मदन थापा, आशीष रावत, दीपक थापा, नरेन्द्र सिंह, योगेन्द्र सिंह, करन सिंह, सिराज राय, हरिकेश सिंह, राजेश थापा, कमल थापा, रंजीत राय, किशन उर्फकृष्णपाल सिंह, रेशम थापा, हिमांशु सिंह, भारत थापा और राहुल गौतम शामिल थे।