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Lucknow News: पेशाब की जांच शुरुआती अवस्था में बता देगी किडनी की बीमारी

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मधुमेह की बीमारी क्राॅनिक किडनी रोग के लिए बड़ा खतरा है। किडनी की बीमारी को साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि शुरुआत में इसके लक्षण पता नहीं चलते हैं। जब व्यक्ति को जानकारी होती है, तब तक देर चुकी होती है। संजय गांधी पीजीआई के सेंटर ऑफ एडवांस्ड रिसर्च एंड एक्सीलेंस ने ऐसा बायोमार्कर तलाशा है जो शुरुआती चरण में ही किडनी की समस्या के बारे में बता देता है।
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यह अध्ययन सेंटर ऑफ एडवांस्ड रिसर्च एंड एक्सीलेंस के तहत पीजीआई में माॅलेकूलर मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलाजी विभाग में किया गया। इसमें लखनऊ के साथ ही पुड्डुचेरी के एक हजार मधुमेह रोगियों को शामिल किया गया। पीजीआई के माॅलेकूलर मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलाॅजी विभाग की प्रमुख डाॅ. स्वस्ति तिवारी ने बताया कि ये बायोमार्कर पेशाब की जांच से पता चलता है। शुरुआती चरण में बीमारी का पता चल जाने पर उसका इलाज करना संभव होता है। अध्ययन की टीम में पुड्डुचेरी के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के सदस्यों के साथ संजय गांधी पीजीआई से डाक्टर धर्मेंद्र के चौधरी, डाक्टर सुखांशी कांडपाल, डाक्टर दीनदयाल मिश्रा और डाक्टर बिश्वजीत साहू शामिल थे।

हर तीसरा मधुमेह रोगी किडनी की बीमारी से पीड़ित

डाॅ. स्वस्ति तिवारी ने बताया कि मधुमेह से पीड़ित हर तीन में से एक व्यक्ति में किडनी की बीमारी पाई जाती है। समस्या यह है कि जब किडनी की बीमारी पता चलती है तब तक देर हो चुकी होती है। अध्ययन में पता चला यह बायोमार्कर मानव मूत्र में नैनो आकार के पुटिकाओं (बाल से हजारों गुना छोटे) के अंदर पाए जाते हैं। ऐसे में मधुमेह रोगियों में शुरुआती अवस्था में ही पेशाब की जांच से किडनी की समस्या का पता लगाया जा सकता है। इस तकनीक को पेटेंट कराने के लिए भारतीय पेटेंट कार्यालय में मार्च 2024 आवेदन किया गया है।
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