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मर गई संवेदना: अस्पताल-दर-अस्पताल भटका पिता, 20 किमी दौड़ा; दुधमुंहे ने तोड़ा दम तो गोद में उठाकर चीत्कार उठा

Thu, 30 Oct 2025 06:37 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

राजधानी में 11 माह के बच्चे के इलाज के लिए एक पिता उसे गोद में लेकर अस्पताल-दर-अस्पताल भटकता रहा। 20 किमी तक की दौड़ लगई। लेकिन, समय पर इलाज नहीं मिला। अंत में केजीएमयू में बच्चे ने दम तोड़ दिया तो गोद में उठाकर पिता चीत्कार उठा। आगे पढ़ें पूरा मामला...
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अस्पताल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ में मासूम बच्चे को समय से मुकम्मल इलाज न मिलने से बृहस्पतिवार को उसकी मौत हो गई। परिजन बच्चे को लेकर एक से दूसरे अस्पताल तक भटकते रहे। लेकिन, कहीं पर भी समय पर इलाज नहीं मिला। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

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अमौसी एयरपोर्ट के पास के रहने वाले शिवा के बेटे कान्हा (11 माह) को निमोनिया की शिकायत थी। परिजन पहले नजदीकी निजी अस्पताल से दवा ले रहे थे, मगर उसकी सेहत में खास सुधार नहीं हुआ। बृहस्पतिवार सुबह बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजन उसे लेकर पहले लोकबंधु अस्पताल गए। 

शिवा ने बताया कि वहां डॉक्टरों ने भर्ती करने की बजाय ट्रॉमा के लिए रेफर कर दिया। दोपहर करीब 12 बजे वह बच्चे को बारिश में भीगते हुए ट्रॉमा लेकर पहुंचे। पर्चा बनाने से लेकर इलाज मिलने में समय बीत गया। इससे बच्चे की सांस उखड़ने लगी। डॉक्टरों ने सीपीआर देकर उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर डाला, मगर उसकी मौत हो गई। 
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परिजनों ने इलाज मिलने में देरी का आरोप लगाते हुए शिकायत की बात कही है। पिता का कहना है लोकबंधु अस्पताल में बच्चे को भर्ती करके इलाज दिया गया होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। 

लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर के मुताबिक, इमरजेंसी में मरीज के नाम का पर्चा नहीं बना है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान लापरवाही मिलने पर संबंधित डॉक्टर व स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति होगी।

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