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RTI : आयोग में सुनवाई पर सूचना अधिकारी ने भेजे प्रतिनिधि, राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने किया तलब

Sun, 31 Jul 2022 06:51 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

राज्य सूचना आयुक्त ने आदेश का पालन न होने की दशा में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 (1) के तहत 250 रुपये प्रतिदिन की दर से अर्थदंड अधिरोपित करने की बात कही है, जो कि जो कि अधिकतम 25000 रुपये तक हो सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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राज्य सूचना आयोग ने सुनवाई पर खुद या विभागीय अधिकारी को भेजने के बजाए अपना प्रतिनिधि भेजने वाले जन सूचना अधिकारी को तलब किया है। मामला कुशीनगर जिले का है, जहां के जन सूचना अधिकारी को सूचना न देने पर आयोग ने सुनवाई में बुलाया था। इस दौरान अधिकारी के पक्ष में तीन बाहरी अधिवक्ता उपस्थित हुए। आयोग ने इसे नियम विरुद्ध बताते हुए अधिकारी को तलब कर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।

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राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने अपने आदेश में जनसूचना अधिकारी/ग्राम विकास अधिकारी, वि.खं. हाटा, जिला कुशीनगर को नोटिस देकर वादी को सूचना उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अगली सुनवाई पर उप्र सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 के नियम 9 (2) के तहत स्वयं आयोग के समक्ष उपस्थित होकर प्रकरण में देरी के लिए लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि वह इस बात का भी स्पष्टीकरण आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें कि उन्होंने अपने स्थान पर तीन अधिवक्ताओं को सूचना अधिकार अधिनियम 2005 एवं उप्र सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 की किस धारा/नियम के तहत मनोनीत किया।

साथ ही पूछा है कि किस मद से उनको भुगतान किया जाता है। राज्य सूचना आयुक्त ने आदेश का पालन न होने की दशा में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 (1) के तहत 250 रुपये प्रतिदिन की दर से अर्थदंड अधिरोपित करने की बात कही है, जो कि जो कि अधिकतम 25000 रुपये तक हो सकता है। सुनवाई की अगली तारीख सितंबर में निर्धारित की गई है।
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यह है मामला
कुशीनगर की तहसील कसया के ग्राम चेगौना जनुवी व सुमाली के रामायण सिंह, वंशगोपाल सिंह, लाल साहब सिंह, अयोध्या सिंह व विजय प्रताप सिंह ने ग्राम पंचायत सोहसा पट्टी गौसी में विकास कार्यों व अन्य विषयों की अलग-अलग सूचना मांगी सूचना मांगी थी। सूचना न मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी के यहां अपील हुई और वहां से भी सूचना न मिलने पर वादियों ने आयोग में अपील की। आयोग ने प्रतिवादी जन सूचना अधिकारी को सूचना देने के निर्देश के साथ ही अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए, लेकिन प्रतिवादी ने न तो वादियों की आपत्ति का निस्तारण किया और न ही खुद उपस्थित हुए। साथ ही अपने प्रतिनिधि के रूप में बाहरी अधिवक्ताओं को भेज दिया।

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