लखनऊ। व्यावसायिक सिलिंडरों की कीमतों में शुक्रवार से हुई भारी वृद्धि से होटल, रेस्तरां और खानपान व्यवसाय से जुड़े लाखों व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है। इस वृद्धि से उनकी लागत सीधे 20-25 फीसदी तक बढ़ गई है। इसका असर अब आम लोगों पर भी पड़ेगा, जिससे उपभोक्ताओं पर 50 फीसदी तक महंगाई का बोझ बढ़ने की आशंका है।
शहर में 1000 से अधिक होटल, 5000 से अधिक रेस्तरां और मिठाई की दुकानें हैं, जबकि 50 हजार से अधिक रेहड़ी पटरी वाले दुकानदार हैं। कीमतें बढ़ने के बावजूद सिलिंडरों की उपलब्धता नहीं है, जिससे इन व्यवसायों के सामने दुकानदारी बचाने की चुनौती है।
कारोबारियों के मुताबिक, पैकेजिंग सामग्री पहले से ही 30 प्रतिशत तक महंगी है। नई कीमतों से मिठाई, बेकरी और अन्य खानपान उत्पादों के दाम भी 20 फीसदी तक बढ़ने की आशंका है, जिससे कुल 50 फीसदी की वृद्धि तय है। उधर, पांच किलो वाला सिलिंडर भी महंगा होने से श्रमिकों को भी झटका लगा है।
कनेक्शनों की सीमित संख्या
सरकार ने घरेलू और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों के नए कनेक्शनों पर रोक लगा रखी है। राजधानी में व्यावसायिक कनेक्शनों की संख्या लगभग 3500 है, जिसमें उद्योग भी शामिल हैं। बिना जीएसटी के व्यावसायिक कनेक्शन नहीं मिलता। इसलिए बिना कनेक्शन वाले व्यापारी जुगाड़ से काम चला रहे थे, लेकिन बढ़ी कीमतों ने उनके सामने समस्या खड़ी कर दी है।
छोटे व्यापारियों पर असर
शहर के 50 हजार रेहड़ी पटरी वाले दुकानदारों को केवल भट्ठियों का सहारा है, क्योंकि उन्हें पांच किलो वाला सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। उत्तर प्रदेश एलपीजी वितरक संघ के अध्यक्ष जगदीश राज ने बताया कि 6 अप्रैल को नियम बदलकर यह सिलिंडर केवल श्रमिकों और छात्रों के लिए ही तय किया गया था। अब 581 रुपये वाला यह सिलिंडर भी 882.50 रुपये का हो गया है।
तीन महीने में 1380 रुपये बढ़े दाम
उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के अविनाश त्रिपाठी बताते हैं कि तीन महीने में 1,380 रुपये दाम बढ़ चुके हैं। व्यापारी कब तक घाटा उठाएंगे। एक सिलिंडर की लागत अब सीधे 1,000 रुपये बढ़ गई है, इसलिए अब बिना दाम बढ़ाए गुजारा नहीं होगा।