लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अब उद्योगों की जरूरत के हिसाब से पढ़ाई और प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), साइबर सुरक्षा और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, उद्योगों की मांग के अनुसार पाठ्यक्रमों में बदलाव, विशेष प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और कैंपस प्लेसमेंट की व्यवस्था को विस्तार दिया जाएगा।
इस दिशा में सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में लखनऊ विश्वविद्यालय और इन्वेस्ट यूपी के बीच गोमतीनगर के एक होटल में आयोजित समारोह में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। विवि की ओर से कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप की गई इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल बनाना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, औषधि निर्माण और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने के साथ प्रशिक्षित युवाओं की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में लविवि और उद्योगों के बीच समन्वय बढ़ाकर विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की योजना है।
निवेश और जरूरत के हिसाब से तय होगा पाठ्यक्रम
समझौते के तहत इन्वेस्ट यूपी प्रदेश में आने वाले निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की जरूरत से जुड़ा आंकड़ा विश्वविद्यालय के साथ साझा करेगा। इसके आधार पर विवि पाठ्यक्रमों, वैकल्पिक विषयों और कौशल प्रशिक्षण में बदलाव करेगा। नए विशेषज्ञता पाठ्यक्रम और उद्योगों से जुड़े प्रमाणपत्र कार्यक्रम भी शुरू किए जा सकेंगे।
शोध से लेकर नौकरी तक उद्योगों से जुड़ेंगे विद्यार्थी
उत्कृष्टता केंद्रों के जरिये विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जुड़ी पढ़ाई और शोध के अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, उद्योगों के सहयोग से इंटर्नशिप, प्रशिक्षुता और कैंपस भर्ती अभियान चलाए जाएंगे। अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को उद्योगों के सहयोग से परियोजनाओं पर काम करने का अवसर भी मिलेगा।
उद्योगों की समस्याओं पर होगा संयुक्त शोध
समझौते में उद्योगों की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए वित्तपोषित शोध, संयुक्त पेटेंट और नवाचार को बढ़ावा देने का भी प्रावधान है। उद्योग विशेषज्ञों को अतिथि शिक्षक के रूप में जोड़ने के साथ विश्वविद्यालय के शिक्षकों को औद्योगिक प्रतिष्ठानों में प्रशिक्षण और कामकाज समझने का अवसर दिया जाएगा। इससे शिक्षण, शोध और उद्योगों की जरूरतों के बीच तालमेल बढ़ाने में मदद मिलेगी।