उद्यमियों की उम्मीदों से जुड़ा इंडस्ट्रियल सर्विसेज गारंटी फंस गया है। पहले अध्यादेश, फिर विधेयक के जरिये इस प्रस्ताव को अधिनियम का शक्ल देने की बातें कही गई थीं। पर, अब इस पर ग्रहण लग गया है।
शासन ने पिछले साल उद्यमियों के एक महासम्मेलन में उद्योगों की स्थापना से जुड़ी समस्त कार्यवाही समयबद्ध ढंग से निस्तारित करने के लिए जनहित गारंटी अधिनियम की तरह इंडस्ट्रियल सर्विसेज गारंटी एक्ट लाने की घोषणा की थी।
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने इस संबंध में कई बार दिशा-निर्देश जारी किए। प्रस्ताव पर तेजी से कार्यवाही बढ़ी और विधानमंडल सत्र आहूत न होने की वजह से इसे अध्यादेश के जरिये लागू करने की सहमति बन गई।
पर, जब तक अध्यादेश की औपचारिकता पूरी होती विधानमंडल का वर्ष 2014 का पहला सत्र आहूत हो गया। विधानमंडल से अधिनियम पास करवाकर चुनाव के पहले लागू करने की कोशिश बढ़ी।
मगर तमाम दावे के बावजूद प्रस्ताव पत्रावलियों में ही उलझा रह गया। जानकार बताते हैं कि अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग ने इसे एक्ट का रूप देने के लिए इससे जुड़े कई दूसरे विभागों की भी राय मांगी थी।
कुछेक विभागों से राय आने में इतनी देरी हुई कि चुनाव आचार संहिता लागू हो गई। जानकार बताते हैं कि इस एक्ट से उद्यमियों को सीधे राहत मिलनी है। ऐसे में अब चुनाव भर इस पर आदर्श आचार संहिता की तलवार रहेगी।