अधिवेशन में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को संबोधन सुनते उपसि्थ्ात लोग। स्रोत ः आयोजक
लखनऊ। शोध और नवाचार के दम पर भारत वैश्विक फार्मा क्षेत्र में अपनी क्षमता लगातार मजबूत कर रहा है। सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं और टीकों के सबसे बड़े प्रदाताओं में शामिल भारत अब फार्मेसी के विद्यार्थियों और युवाओं को अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ये बातें परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहीं।
मौका था शनिवार को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में शुरू हुए फार्माविजन के 13वें राष्ट्रीय अधिवेशन का। इसमें देश के फार्मा क्षेत्र की वैश्विक भूमिका और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर मंथन हुआ।
दो दिवसीय अधिवेशन में परिवहन मंत्री ने कहा कि भारत शोध और नवाचार के जरिए वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता मजबूत कर रहा है। उन्होंने फार्मेसी के विद्यार्थियों और युवाओं से अनुसंधान व नवाचार में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने भारत को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं तथा टीकों का सबसे बड़ा प्रदाता बताया।
आर्ब्रो ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौरभ अरोरा ने कहा कि भारत का फार्मा क्षेत्र वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वहीं, अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि भारत ने वैश्विक फार्मेसी क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका मजबूत की है। उन्होंने भारत को दुनिया की फार्मेसी बताया और इसे विकसित भारत 2047 के संकल्प से जोड़ा। यह प्रभुत्व वैश्विक स्वास्थ्य और मानव कल्याण में भारत के योगदान का माध्यम है।
779 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
अधिवेशन में अलग-अलग राज्यों से आए 779 प्रतिभागी शामिल हुए। इनमें 465 छात्र और 311 छात्राएं थीं। नेपाल से भी एक प्रतिनिधिमंडल ने अधिवेशन में भाग लिया। फार्माविजन के राष्ट्रीय प्रमुख ईश्वर प्रसाद, राष्ट्रीय संयोजक अपूर्व नंदी और राष्ट्रीय सह संयोजिका श्रेया वशिष्ठ भी उपस्थित रहीं।
अधिवेशन में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को संबोधन सुनते उपसि्थ्ात लोग। स्रोत ः आयोजक