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सोने का सिंह बनाना है भारत को : रामभद्राचार्य

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पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य
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विनीत चतुर्वेदी
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लखनऊ। बृज की रसोई परिसर में बृहस्पतिवार को पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अमर उजाला के सवालों के जवाब में कहा कि भारत को सोने की चिड़िया नहीं, सोने का सिंह बनाना है। असली रामराज्य क्या है के सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में सभी को अपने धर्म व मत के अनुसार जीवन जीने की आजादी हो, संप्रभु भारत आयातक नहीं निर्यातक राष्ट्र बने।
मंदिरों में वीआईपी कल्चर से दर्शन के सवाल पर उन्होंने कहा कि मंदिर ही नहीं, देश में कहीं भी वीआईपी नहीं होना चाहिए। ईश्वर के दरबार में सब समान हैं। डिजिटल पीढ़ी और युवाओं को सनातन संस्कृति व रामचरितमानस से कैसे जोड़ें के सवाल पर उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए मेरा संदेश है-चरित्रवान बनो। प्रातः काल उठो, व्यायाम करो, ब्रह्मचर्य का पालन करो, सत्यवादी बनो और राष्ट्र के प्रति समर्पित रहो। साथ ही, त्याग की भावना रखो-यदि तुम्हारे पास भोजन है और सामने कोई भूखा है, तो उसे खिलाना ही धर्म है।
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चित्रकूट में विराट गुरुकुल की स्थापना कर रहे रामभद्राचार्य ने कहा कि इस संस्थान के माध्यम से वह देवभाषा संस्कृत को देश के 140 करोड़ लोगों तक ले जाएंगे। संस्कृत एक रोजगारपरक भाषा है। भारत अब सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के दाैर में प्रवेश कर चुका है।
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सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के इस दौर में सनातन धर्म का अगला लक्ष्य क्या होना चाहिए के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारा मूल लक्ष्य यह होना चाहिए कि हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। अब सनातन अत्याचार नहीं सहेगा। साथ ही, समाज में संयुक्त परिवार की परंपरा को फिर से जीवित करना होगा। मेरी मांग है कि रामचरितमानस को राष्ट्रग्रंथ और हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया जाए।

पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य

पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य

पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य

पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य

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