जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए 45 सदस्यीय जिला पंचायत में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। चाहे वह सत्तारूढ़ भाजपा हो या फिर मुख्य विपक्ष समाजवादी पार्टी। सभी की निगाहें 19 निर्दलीय जिला पंचायत सदस्यों पर लगी हुई है। जिला पंचायत का चुनाव लड़ने वाले लोग इन्हीं निर्दलीयों पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने पूरे दमखम से कदम रखा था। सभी 45 सीटों पर पार्टी ने अपने समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा की थी, लेकिन जब चुनाव का रिजल्ट आया तो मात्र 2 सीटों पर ही पार्टी को जीत हासिल हुई। प्रदेश में मुख्य विपक्ष की भूमिका निभा रही समाजवादी पार्टी को 7 सीटें मिली बहुजन समाज पार्टी को 5 सीटें व कांग्रेस को 3 सीटें मिली। सबसे अधिक सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों की रहीं। अब जिला पंचायत अध्यक्ष का निर्वाचन होना हैं।
ऐसे में सत्ता की चाबी निर्दलियों के पास है। निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष उषा सिंह फिर से जिला पंचायत का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। वहीं, पूर्व विधायक चंद्र भद्र सिंह सोनू की बहन अर्चना सिंह भी जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए निर्वाचित सदस्यों से संपर्क कर रही हैं। सपा को हाई कमान के निर्दशों का इंतजार है।