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Lucknow News: केजीएमयू में बनेगा स्वतंत्र फिजियोथेरेपी विभाग, कुलपति ने दिया आश्वासन

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कार्यक्रम का शुभारंभ करतीं कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद।
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लखनऊ। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के मौके पर कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने केजीएमयू में स्वतंत्र फिजियोथेरेपी विभाग के गठन का आश्वासन दिया है। इसके लिए उन्होंने प्रोविंशियल फिजियोथेरेपिस्ट एसोसिएशन से प्रस्ताव देने के लिए कहा।
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संस्थान के कलाम सेंटर में मंगलवार को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर हुए कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि चोट या ऑपरेशन के बाद इलाज केवल सर्जरी और दवाओं तक सीमित नहीं रहता। फिजियोथेरेपी की इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने अस्पताल के विभिन्न विभागों में फिजियोथेरेपी की आवश्यकता बताई।
डीन केके सिंह ने सुविधाओं और संसाधनों के विस्तार पर जोर दिया। वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट योगेश माध्यान ने कंधे की सर्जरी के बाद मरीजों के रिहैबिलिटेशन की जानकारी दी। प्रोविंशियल फिजियोथेरेपिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल मिश्रा ने स्वतंत्र विभाग बनाने की मांग रखी। उन्होंने फिजियोथेरेपिस्टों की समस्याओं के समाधान की भी बात कही। कुलपति ने समस्याओं के प्राथमिकता पर निस्तारण और संघ के साथ जल्द बैठक का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में 25 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट तेजबीर सिंह को सम्मानित किया गया।
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फिजियोथेरेपी का महत्व
फिजियोथेरेपी शरीर के प्रभावित हिस्से की ताकत और गतिविधि वापस लाने में मदद करती है। कंधे की सर्जरी के बाद सही कसरत से जकड़न और दर्द कम होता है। इससे हाथ की सामान्य गतिविधियां वापस आती हैं। खेल के दौरान होने वाली कंधे की चोटों में सही तकनीक बचाव में सहायक होती है।
स्ट्रोक और चोट में लाभ
स्पोर्ट्स मेडिसिन के अभिषेक चौधरी ने बताया कि खिलाड़ियों में कंधे की चोट सामान्य है। फिजियोथेरेपी से इन चोटों के प्रभाव से छुटकारा मिलता है। स्ट्रोक के बाद कमजोर हाथ-पैरों की गतिविधि सुधारने में यह सहायक है। फ्रैक्चर या ऑपरेशन के बाद मांसपेशियों की ताकत वापस लाने में भी मदद मिलती है। नियमित रिहैबिलिटेशन से मरीज रोजमर्रा के काम करने की क्षमता हासिल करते हैं।
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