मेहनत, लगन और नंबर लाने में ये स्टूडेंट्स किसी से कम नहीं हैं। दीक्षांत समारोह के दौरान इनके हाथों में डिग्री तो होती है पर टॉप करने के बावजूद इनके गले में मेडल नहीं पहनाए जाते। सुनने में अजीब है, पर यह सच है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के 43 विभागों में से आठ विभाग ऐसे हैं जिनमें एक भी मेडल नहीं दिया जाता। यहां स्टूडेंट्स टॉप तो करते हैं पर मेडल नहीं पाते।दूसरी ओर कई विभाग ऐसे हैं जहां एक ही कोर्स में टॉप करने पर स्टूडेंट को दर्जन भर तक मेडल मिल जाते हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय में चांसलर्स और डॉ. चक्रवर्ती के साथ ही कुछ को छोड़कर बाकी मेडल किसी न किसी की ओर से प्रायोजित किए जाते हैं। दीक्षांत समारोह में डिग्री के साथ ही स्टूडेंट्स को ये मेडल दिए जाते हैं।
विवि में इस समय 43 विभाग हैं। इनमें से फिजिकल एजूकेशन, कंप्यूटर साइंस, पब्लिक पॉलिसी, ज्योर्तिविज्ञान, फ्रेंच, ट्रेवेल एंड टूरिज्म, वूमेन स्टडीज और फाइन आर्ट्स ऐसे विभाग हैं जिनमें पीएचडी के लिए सीट है, पर मेडल एक भी नहीं है।ऐसे में इन विभाग के स्टूडेंट हमेशा टॉप करने के बावजूद दीक्षांत समारोह में दूसरे साथियों को मेडल पाता देख केवल तालियां ही बजाते रहते हैं।
लॉ में सबसे ज्यादा 24 मेडल
मेडल देने के मामले में टॉप पर लॉ विभाग है। यहां पर एलएलबी, एलएलएम और एलएलबी ऑनर्स में कुल मिलाकर 24 मेडल दिए जाते हैं। इस सूची में 12 मेडल के साथ मैथ्स विभाग दूसरे और प्राचीन भारतीय इतिहास नौ मेडल के साथ तीसरे नंबर पर है। सोशल वर्क, फिजिक्स, पॉलीटिकल साइंस, विभागों में भी मेडल की संख्या काफी अधिक है।
शोध के लिए सिर्फ छह मेडल
विश्वविद्यालय की पहचान मुख्य रूप से पढ़ाई के अलावा रिसर्च करने के लिए होती है। शोध के लिए स्टूडेंट्स को प्रोत्साहित करने के मामले में भी लखनऊ विश्वविद्यालय काफी पिछड़ा है। विवि के 192 मेडल में से शोध के लिए केवल छह मेडल ही हैं। ये मेडल भी पीजी, एमफिल, पीएचडी और डीलिट पाठ्यक्रमों में दिए जाते हैं। विवि में शोध के लिए विभागवार मेडल नहीं दिए जाते