लखनऊ। रमजान उल मुबारक का दूसरा मगफिरत का अशरा (दस दिन) शुक्रवार को रुखसत हो गया। मगफिरत के अशरे में रोजेदारों ने इबादत कर गुनाहों की माफी मांगी, ताकि अल्लाह मगफिरत की राह आसान कर दे। आखिरी अशरे की दस रातों में अब जहन्नम से निजात के लिए रोजेदारों के सिर अल्लाह की बारगाह में झुकेंगे और इबादत में रह गई कमी को पूरा करेंगे।
रमजान के पहले अशरे में रोजेदारों ने नमाज अदा की और कुरान की तिलावत कर अल्लाह को राजी करने के लिए अपना हर लम्हा इबादत में गुजारा। शुक्रवार को रमजान का दूसरा अशरा संपन्न होने पर मस्जिद डालीबाग के इमाम मौलाना मोहम्मद शमीम ने कहा, रमजानुल रमजान के आखिरी दस दिनों में शब-ए-कद्र रखकर अल्लाह ने अपने बंदों पर खास मेहरबानी की है।
शब-ए-कद्र की रात एक हजार महीनों की इबादत से ज्यादा फायदा पहुंचाने वाली है। मदार बख्श मस्जिद के इमाम मौलाना असद उल्लाह ने कहा, शब-ए-कद्र खुदा पक से करीब होने का बेहतरीन जरिया है।
गुनाहों की माफी के लिए झुकाया सिर
रमजान उल मुबारक के तीसरे जुमे में शुक्रवार को इबादतगारों ने अल्लाह की बारगाह में गुनाहों की माफी के लिए सिर झुकाया। जुमे की नमाज में गरीबों की मदद करने की अपील की। मौलाना अबुल इफरान मियां फिरंगी महली ने कहा, जकात निकालना हर मालदार मुसलमान पर फर्ज है। रमजान जकात देने के लिए बेहतरीन महीना है। टीले वाली मस्जिद के इमाम मौलाना फजलुल मन्नान रहमानी ने कहा, रमजान के बचे दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने के साथ ही गरीबों का भी ख्याल रखना चाहिए। दुबग्गा स्थित स्थित मस्जिद अबु तालिब में मौलाना काजिम वाहिदी ने हजरत अली की शिक्षा को अपनी जिंदगी में शामिल करने की अपील की।