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कार एजेंसी के मालिक बन करोड़ों की रकम उड़ाने वाले तीन गिरफ्तार

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लखनऊ। कार एजेंसियों के मालिक बनकर मैनेजर, अकाउंटेंट और अन्य कर्मचारियों को कॉल कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को एसटीएफ ने दबोच लिया है। उसके दो अन्य साथी भी गिरफ्तार किए गए हैं। टीम ने आरोपियों को मोहान रोड फ्लाईओवर के नीचे आगरा एक्सप्रेस-वे के पास से गिरफ्तार किया है। उनके पास से क्रेडिट कार्ड, पांच मोबाइल, तीन आधारकार्ड, कार, सिमकार्ड, सिम किट, 16 फर्जी दस्तावेज और नकदी बरामद हुई है।
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एसएसपी एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों में मूलरूप से बुलंदशहर के गुलावटी ऐचाना निवासी विजय कुमार प्रजापति, गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर विकासकुंज इंदिरापुरी का प्रदीप शर्मा और हर्ष विहार दिल्ली का अमीरुद्दीन उर्फ आमिर शामिल है। इन सभी ने कार एजेंसी के मालिक बनकर एसबीआई की इस्माइलगंज शाखा में कॉल कर खुद को पूर्व प्रबंधक बताया। फिर चालू खाते से मोटी रकम दूसरे खाते में स्थानांतरित करा ली। एसएसपी विशाल विक्रम के मुताबिक, इस मामले में इस्माइलगंज शाखा की मुख्य प्रबंधक स्वाति अग्रवाल ने पिछले साल गाजीपुर थाने में केस दर्ज कराया था। पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
खाते से उड़ाए थे 33.20 लाख
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक, एसबीआई की मुख्य प्रबंधक स्वाति का आरोप था कि जब उन्होंने ज्वॉइन किया तो पूर्व मैनेजर दीपक सिंह ने कॉल कर कहा कि निवान बाला जी ऑटो मूवर्स प्रा. लि. के नाम से चालू खाता है। इसके प्रबंधक नवनीत पांडेय हैं। वह कॉल करेंगे, बैंक से संबंधित कार्य के लिए कहेंगे। इसी कॉल के कुछ देर बाद ही जालसाज ने कॉल किया। खुद को नवनीत पांडेय बताया। परिचय किआ मोटर्स के निदेशक के रूप में दिया। कहा कि वह अस्पताल में है, कुछ कर्मचारी भर्ती हैं। उन्हें तत्काल रुपये की जरूरत है। चेकबुक खत्म हो गई है। सहयोग न करने पर शिकायत करने की धमकी भी दी। कुछ देर बाद व्हाट्सएप पर दो पत्र भेजे। जो निवान बालाजी ऑटो मूवर्स के लेटर हेड पर थे। पत्र में चार कर्मचारियों के बैंक खातों को एड कर तत्काल आरटीजीएस के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया था। जालसाज ने बैंक से चार कर्मचारियों के खातों में 33,20,436 रुपये ट्रांसफर करा लिए।
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गाड़ी खरीदने का झांसा देकर एजेंसियों से लिया था बैंक डिटेल
एसएसपी एसटीएफ के मुताबिक, इस मामले का खुलासा 29 सितंबर 2021 को किया गया था। उस समय पकड़े गये तीन आरोपियों ने कुबूल किया था कि उनका बड़ा गिरोह है। गिरोह में विजय प्रजापति, विनय उर्फ बबलू, कपूर चाचा, प्रदीप शर्मा, अमीरूद्दीन, साहिल शामिल हैं। सभी गूगल से कार एजेंसियों की जानकारी हासिल करते थे। गाड़ी खरीदने का झांसा देकर एजेंसियों के बैंक डिटेल लेते थे। इसके बाद व्हाट्सएप अकाउंट पर मालिकों की फोटो की डीपी लगाते थे। फिर बैंकों के प्रबंधकों को कॉल व मेसेज भेजकर भरोसा हासिल करते थे। फिर कंपनी में इमरजेंसी होने का झांसा देकर, धोखे से अलग-अलग बैंक खातों में रुपये डलवा लेते थे। जब रुपये बैंक खातों में आ जाते थे तब उन खातों से इंटरनेट बैंकिंग व मोबाइल बैंकिंग के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर करते और फिर उसे निकाल लेते थे।
यूपी, छत्तीसगढ़, हैदराबाद व हिमांचल के 30 बैंकों से उड़ाए करोड़ों रुपये
एसएसपी एसटीएफ ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में कुबूल किया है कि अब तक गिरोह ने 30 बैंकों से कई करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। इसी गिरोह ने हैदराबाद में बैंक से 36 लाख रुपये हाल ही में उड़ाए थे जिसका मुकदमा साइबराबाद थाने में दर्ज है। वहां तीन और केस दर्ज हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के दुर्ग के मोहननगर थाने में 28.50 लाख की ठगी इसी साल की। वहीं हिमांचल प्रदेश के पालमपुर में दो साल पहले गिरोह ने पीएनबी से 8.50 लाख रुपये उड़ाये थे। गाजियाबाद व बरेली में भी कार एजेंसियाें के मालिक बनकर ठगी की। इस गिरोह पर 30 केस दर्ज हैं।
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