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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष बातचीतः कहा- साल भर में पटरी पर होगी अर्थव्यवस्था

Fri, 05 Jun 2020 06:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजीव सिंह व अनिल श्रीवास्तव , लखनऊ

सार

  • लॉकडाउन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पहला इंटरव्यू
  • कोरोना की चुनौती के लिए यूपी पूरी तरह तैयार
  • जरूरत पड़ी तो 15 लाख लोगों को कर सकते हैं क्वारंटीन
  • 15 जून तक 15 हजार तक पहुंचा देंगे जांच की क्षमता
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सीएम योगी का साक्षात्कार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उम्मीद है कि प्रदेश जल्द ही कोरोना संकट से उबर जाएगा। वह मानते हैं कि कोरोना के कारण प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है और पहले से चल रही योजनाएं प्रभावित हुई हैं लेकिन उन्हें भरोसा है कि अगले तीन-चार माह में स्थिति सामान्य हो जाएगी और एक साल में प्रदेश की अर्थव्यवस्था पहले की तरह पटरी पर आ जाएगी। सीएम योगी के अनुसार यूपी कोरोना की चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। अभी प्रदेश में रोजाना 10 हजार टेस्ट हो रहे हैं। 15 जून तक यह क्षमता 15 हजार प्रतिदिन हो जाएगी। योगी ने कहा कि अगर मार्च में लॉकडाउन न होता तो भारत जैसे 135 करोड़ की आबादी वाले देश में आज स्थिति भयावह होती। प्रवासी श्रमिकों को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा की गारंटी मुहैया कराने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि यूपी की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में इनकी ऊर्जा व प्रतिभा का इस्तेमाल किया जाएगा। बीते तीन माह में कोरोना के कारण सरकार के सामने खड़ी चुनौतियों समेत अन्य मुद्दों पर सीएम योगी ने बृहस्पतिवार को राजीव सिंहअनिल श्रीवास्तव से विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंशः-

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कोरोना के मद्देनजर स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त करने में कहां तक कामयाब रहे हैं?
कोरोना से निपटने के लिए हमारी तैयारी पूरी है। इस समय हमारे पास एक लाख एक हजार बेड हैं। भगवान करे ऐसी स्थिति न आए, लेकिन अगर संक्रमण फैलता है तो हमारे पास 15 लाख लोगों को क्वारंटीन सेंटर में रखने की व्यवस्था है। आज एक दिन में 10 हजार लोगों की जांच कर सकते हैं। 15 जून तक यह क्षमता बढ़कर 15 हजार तक पहुंचा देंगे। नॉन कोविड हास्पिटल में भी बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर फोकस है। जिनको कोरोना नहीं, अन्य बीमारियां हैं उनके लिए भी इमरजेंसी सेवाएं चलें इसके लिए खास ध्यान दिया जा रहा है।
 
विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना का पीक अभी बाकी है। लॉकडाउन खुल गया है। ऐसे में सरकार की क्या रणनीति है?
विशेषज्ञ कहते थे कि मई अंत तक यूपी में 65 से 70 हजार केस होंगे। हम लोगों ने उसे 8 हजार तक सीमित कर दिया। इनमें से 5000 से ज्यादा ठीक होकर घर जा चुके हैं। लॉकडाउन का मकसद लोगों को जागरूक करना था। इसी का नतीजा है आज हम लोग संक्रमण की स्टेज को हर स्तर पर रोकते गए, तोड़ते गए। अब हर व्यक्ति घर से बाहर निकलने पर मास्क लगा रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहा है। सरकार की कोशिश है कि लोग स्वयं इसका कड़ाई से पालन करें। सावधानी ही कोरोना जैसे संक्रमण से उन्हें बचा पाएगी।

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जीवन में संतुलन ही अध्यात्म, इसी से खुला सफलता का रास्ता

सीएम योगी का साक्षात्कार - फोटो : अमर उजाला
कोरोना से जंग की चुनौतियों को कैसे संभाला?
 मैं मूल रूप से आध्यात्मिक व्यक्ति हूं। जीवन में संतुलन ही अध्यात्म है। संतुलन बनाए रखना ही जीवन की कला होती है। इसी को जीना कहते हैं। व्यक्ति जब अपने जीवन में संतुलन ला देता है तो सफलता का रास्ता अपने आप खुल जाता है। सकारात्मक और नकारात्मक चीजें चलती रहती हैं। इनमें संतुलन ही कामयाबी की ओर ले जाता है। - योगी आदित्यनाथ

क्या आपको लगता है कि लॉकडाउन का निर्णय सही समय पर किया गया?
प्रधानमंत्री ने जिस समय लॉकडाउन की घोषणा की थी, वह सबसे उपयुक्त समय था। अगर लॉकडाउन मार्च में नहीं होता तो भारत की स्थिति बहुत खराब होती। यह सही समय पर उठाया गया सही कदम था। लॉकडाउन का फायदा यह हुआ कि 135 करोड़ की आबादी वाले भारत में संक्रमण के केस दो लाख हैं। मौत के आंकड़े 6000 के अंदर हैं। अमेरिका की आबादी के हिसाब से देखें तो दोनों देशों में कोरोना संक्रमण एक साथ आया था। अमेरिका का हेल्थ सिस्टम हमसे ज्यादा मजबूत है। इसके बावजूद अमेरिका में संक्रमण 18 लाख और मौत का आंकड़ा एक लाख पार कर चुका है। कम आबादी के बावजूद वहां संक्रमण ज्यादा फैल गया। भारत ने समय पर निर्णय लेकर और कोरोना के संक्रमण को रोकने के साथ ही लोगों की जान बचाने का काम किया।

चीन से पलायन करने वाली कंपनियों के यूपी में निवेश करने की कितनी संभावनाएं देखते हैं?
हमारे यहां अनुकूल परिस्थितियां हैं। देश का सबसे बड़ा बाजार है। हम इसका फायदा उठाएंगे। निवेशकों को हर तरह की सुविधाएं व सहूलियतें देंगे। यूपी इसके लिए पूरी तरह तैयार है।

कोरोना से लड़ाई में पूरे संसाधन व शक्ति झोंकनी पड़ी, इस पर काबू पाते ही पुरानी स्थिति में आ जाएंगे...

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
यूपी की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। राजस्व वसूली में भी भारी गिरावट आई है। भरपाई कैसे करेंगे?
जहां तक अर्थव्यवस्था का सवाल है तो आर्थिक समृद्धि जनता की खुशहाली के लिए होती है। पहले जनता की जान बचाना आवश्यक था। उसमें काफी हद तक सफलता मिली। अब चार चरणों के लॉकडाउन के बाद अनलॉक की घोषणा अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की ही दिशा में एक बड़ा कदम है। लगभग सभी चीजें अपने रूटीन पर आ चुकी हैं। मुझे लगता है कि एक-दो महीने में सारी अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। हमारी अपनी कार्ययोजनाएं थीं, लेकिन हमें कोरोना में उलझना पड़ा। सारे संसाधन और सारी शक्ति लगानी पड़ी। जैसे ही हम इससे उबरेंगे, सभी कार्य पुरानी स्थिति में आ जाएंगे। तीन-चार महीने का गैप तो आ ही जाएगा। इसकी भरपाई करने में एक साल लग जाएगा। अगर इस दौरान हम कोरोना पर काबू कर लेंगे तो एक साल के अंदर पुरानी वाली स्थिति प्राप्त कर लेंगे।
 
कोरोना के कारण पैदा हुए हालात में यूपी के लिए क्या संभावनाएं देखते हैं?
ढेर सारी संभावनाएं हंै। निवेश के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ का जो पैकेज घोषित किया है, उससे समाज का कोई तबका वंचित नहीं रहेगा। एमएसएमई सेक्टर के लिए जिस प्रकार की घोषणाएं की गई हैं, वे नए सिरे से एक स्वावलंबी व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करेंगी। यूपी एमएसएमई का सबसे बड़ा हब रहा है। पटरी व्यवसायी, ठेला, रेहड़ी, खोमचा लगाने वाले स्ट्रीट वेंडर आदि के बारे में जो घोषणाएं व कार्यक्रम, किसानों के लिए ब्लाॅक व पंचायत स्तर पर किसान उत्पादन संगठन (एफपीओ) के माध्यम से भंडारण की व्यवस्था और उस प्रक्रिया को तेजी से बढ़ाने की कार्यवाही, एक देश एक बाजार की व्यवस्था को लागू करना देशहित में उठाए गए बड़े कदम हैं।

भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार 8 जून से धार्मिक स्थल खुलने हैं। इसे लेकर आपकी क्या रणनीति है?
इसके लिए भी नियमावली बनाएंगे। उसी के अनुसार सारी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कार्यवाही की जाएगी। भारत सरकार के अनुरूप प्रदेश सरकार भी गाइडलाइन तैयार करेगी। सभी स्वयंसेवी, सामाजिक संगठनों और सभी धर्म गुरुओं ने बहुत सहयोग किया है।

संक्रमण और न फैले, इसके लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?
संक्रमण से सबको बचाया जा सकता है बशर्ते मरीज की समय पर जांच हो जाए। कोरोना के इलाज की सारी व्यवस्थाएं भी हैं, लेकिन इसमें विलंब होने से स्थिति बिगड़ रही है। सबसे बड़ी चुनौती लोगों को जागरूक करने की है कि वे बीमारी न छिपाएं। सरकार ने सर्विलांस सिस्टम तैयार कराया है, लेकिन लोगों को भी आगे आना होगा। बीमारी को छिपाने का सीधा अर्थ है कि वे इसे फैला रहे हैं।

इस जटिल समय में आप कैसे अपने को मजबूत रखकर शासन चला रहे हैं?
यह टीम वर्क है। केंद्र सरकार का सहयोग है। एक टीम काम कर रही है। जनप्रतिनिधि हैं, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी हैं, कोरोना वारियर्स हैं। मीडिया की पॉजिटिव खबरें इन चीजों को आगे बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।

कोरोना काल में कई बार नकारात्मक सूचनाएं ज्यादा आती हैं। ऐसे में तनाव से दूर कैसे रह पाते हैं?
ये चीजें चलती रहती हैं। अच्छी हों या बुरी। जीवन एक संतुलन का नाम है।

यह संतुलन आप कैसे करते हैं?
मैं मूल रूप से आध्यात्मिक व्यक्ति हूं। जीवन में संतुलन ही अध्यात्म है। संतुलन बनाए रखना ही जीवन की कला होती है। इसी को जीना कहते हैं। व्यक्ति जब अपने जीवन में संतुलन ला देता है, तो सफलता का रास्ता अपने आप खुल जाता है।

प्रवासी मजदूर खुद परेशान थे, हमने राहत दी... अब उनकी प्रतिभा से अर्थव्यवस्था मजबूत करेंगे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
क्या प्रवासियों के कारण स्थिति कुछ बिगड़ी है या उनमें संक्रमण फैलने का डर अब भी है?
ऐसा कुछ नहीं। प्रवासी मजदूरों के सामने भी परेशानी थी। उनकी परेशानी का समाधान होना आवश्यक था। हम लोगों ने भारत सरकार के सहयोग से उनको राहत देने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाई। आज बाहर से आया हर व्यक्ति अपने गांव-घर पहुंचकर सुकून महसूस कर रहा है। वहां उन्हें सुविधाएं दी जा रही हैं। सरकार उनकी सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा की गांरटी देने जा रही है। हम सभी को पूरी मजबूती के साथ सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा की गारंटी देंगे। यूपी की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का उनकी ऊर्जा व प्रतिभा का इस्तेमाल होगा।

किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में विशेष घोषणा करके सहायता उपलब्ध कराई गई। हर किसान को 2000 रुपये महीने उनके अकाउंट में सीधे भेजा जा रहा है। खाते में दो बार पैसा आ चुका है। तीसरी बार आने जा रहा है।
 
कांग्रेस का आरोप है कि कोरोना संकट में सरकार की व्यवस्था ठीक नहीं है?
कांग्रेस को जमीनी हकीकत नहीं दिख रही है। या यूं कहें कि कांग्रेसी नेता जमीन पर उतरना ही नहीं चाहते हैं। उन्हें प्रदेश की व्यवस्था को देखने के लिए धरातल पर आना होगा।

क्या प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने की संभावना है?
इस बारे में अभी कुछ कह नहीं सकते। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। हर परिस्थिति पर विचार करने के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकेगा।

प्रदेश के अस्पतालों में मेडिकल संक्रमण न फैले इस दिशा में क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
जब कोरोना संकट शुरू हुआ तब केजीएमयू से कोविड अस्पताल की शुरूआत की गई। फिर प्रदेश में त्रिस्तरीय अस्पताल की व्यवस्था बनाई गई। इनमें लेवल-1, लेवल-2 और लेवल-3 के अस्पताल बनाए गए। लेवल-1 में सामान्य बेड और आक्सीजन की व्यवस्था भी की गई। लेवल-2 को कोविड अस्पताल बनाया गया, इनमें सभी बेडों पर ऑक्सीजन के साथ कुछ वेंटीलेटर की व्यवस्था की गई। लेवल-3 के अस्पताल में सभी बेड पर वेंटीलेटर के साथ साथ डायलिसिस समेत तमाम प्रकार की सुविधाएं दी गईं। प्रदेश में लेवल-1 के 403 अस्पताल बनाए गए हैं, जिनमें 22,934 बेड हैं। प्रदेश के हर जिले में एक-एक लेवल-2 के अस्पताल हैं। इन 75 अस्पतालों में 16,212 बेड हैं। जबकि लेवल-3 के 25 अस्पतालों में 12,090 बेड की व्यवस्था है।
 
कोविड अस्पतालों की मॉनिटरिंग के लिए क्या इंतजाम हैं?
प्रदेश में कोविड अस्पताल में हर तरह की सुविधाएं मुहैया करवाई गई हैं। इनमें पीपीई किट, एन 95 मास्क, ग्लव्स समेत सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। हर जगह इन्फ्रारेड थर्मामीटर और पल्स ऑक्सीमीटर की व्यवस्था की गई है। आरटीपीसीआर से सैंपल की रिपोर्ट आते-आते 12 घंटे लग जाते थे। सरकार ने ट्रूनेट मशीनें मंगवाई। इससे एक घंटे में रिपोर्ट आ जाती है। इन मशीनों को नान कोविड अस्पतालों के इमरजेंसी सेवाओं में लगाया जा रहा है। कोविड व नान कोविड अस्पतालों, कम्युनिटी किचन और क्वारंटीन सेंटर की मॉनिटरिंग के लिए हर जिले में विशेष सचिव स्तर के अधिकारियों को नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है।

बहुत से श्रमिक-कामगार बेरोजगार हो गए। इनके लिए आपकी सरकार क्या कर रही है?
लॉकडाउन के दौरान प्रदेश के 119 चीनी मिलों में पेराई जारी रही। 12 हजार ईंट भट्ठे चले। 2500 कोल्ड स्टोरेज पर काम जारी रहा। लॉकडाउन के दूसरे चरण में आर्थिक गतिविधियों को प्रारंभ किया गया। 850 उद्योगों में काम शुरू हुआ। इसमें 65 हजार से ज्यादा कामगारों ने काम शुरू किया। एमएसएमई की 3.25 लाख इकाइयां शुरू हुईं, जहां 25.50 लाख से ज्यादा लोगों को काम मिला। सूक्ष्म श्रेणी के 80 हजार से ज्यादा उद्यम में 2.50 लाख से ज्यादा कामगारों और श्रमिकों को काम मिला। मनरेगा में 40 लाख से ज्यादा श्रमिक काम कर रहे हैं।

वापस आए श्रमिकों की वजह से कोरोना फैल रहा है, इसकी रोकथाम के लिए क्या योजना है?
वापस आए कामगारों-श्रमिकों की स्क्रीनिंग के लिए एक लाख टीमें कार्य कर रही हैं। अब तक 4.85 करोड़ से अधिक मेडिकल स्क्रीनिंग की गई है। इसके अलावा शहरों व गांवों में निगरानी समितियां कार्य कर रही हैं। ये होम क्वारंटीन लोगों की निगरानी में जुटी हैं। वापस आ रहे श्रमिकों-कामगारों को 15 दिन क्वारंटीन सेंटर में रखा जा रहा है। जहां उन्हें भोजन से लेकर मेडिकल परीक्षण की व्यवस्था मुहैया करवाई गई है। जिनमें लक्षण दिखे, उनकी जांच की गई। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
 
बाहरी राज्यों से लौटे श्रमिक हमारे लिए संपदा
बाहरी राज्यों से आने वाले श्रमिकों-कामगारों की स्किल मैपिंग हुई है। उनके हुनर के मुताबिक उन्हें प्रदेश में ही रोजगार और नौकरी मुहैया करवाई जा रही है। इसके लिए प्रवासी आयोग बनाया जा रहा है। सरकार के साथ उद्योग एमओयू कर रहे हैं। फिक्की समेत कई बड़े औद्योगिक संगठन रोजगार देने के लिए आगे आ रहे हैं। बाहरी राज्यों से आने वाले श्रमिक हमारे लिए संपदा हैं। इन्हें रोजगार मुहैया करवाना हमारी प्राथमिकता है।
 
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कोटा में फंसे बच्चों को घर निशुल्क पहुंचाया

दूसरे राज्यों में काम करने वाले श्रमिक व कामगार यूपी के लिए कितनी बड़ी चुनौती थे?
लॉकडाउन में सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली व हरियाणा से पलायन कर रहे श्रमिक-कामगार थे। ये यूपी-बिहार के थे। हमने 24 घंटे के अंदर इस समस्या का समाधान किया। इसके बाद हमारे लिए तब्लीगी जमात चुनौती बनकर सामने आई। उनसे संक्रमण न फैले, इसके लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करवा कर इलाज करवाया गया। पहले चरण के बाद संक्रमण फैलने से रोकने की चुनौती थी। इसके साथ ही आर्थिक गतिविधियों को प्रारंभ करने की चुनौती। लॉकडाउन में हमने कोटा से बच्चों को निशुल्क व सुरक्षित घर पहुंचाया। लॉकडाउन के तीसरे चरण में हमारे लिए बाहरी राज्यों से वापस आने वाले श्रमिक व कामगार बड़ी चुनौती थे। सरकार ने अपने संसाधन व खर्च से इनकी सुरक्षित वापसी के लिए काम शुरू किया। हम 28 लाख से अधिक श्रमिकों-कामगारों को दूसरे राज्यों से यूपी लाए, जबकि 4 लाख से अधिक कामगार-श्रमिक अपने साधन से वापस आए।

शुरुआत में दिल्ली से लगे जिलों में मामले ज्यादा आए। अब ये पूर्वांचल के जिलों में भी पहुंच गया है। अब जो नए तरीके से केस सामने आ रहे हैं, उसे देखते हुए क्या रणनीति में कुछ बदलाव की जरूरत महसूस कर रहे हैं?
हमें पता है कि कोरोना प्रभावित प्रदेशों से करीब 32 लाख से अधिक श्रमिक-कामगार वापस आए हैं। हम इसका पूरा ध्यान रख रहे हैं कि उन्हें बचना है और साथ आ रहे संक्रमण को फैलने से रोकना है। हमने उन सभी क्षेत्रों पर फोकस किया है। गाजियाबाद में देखा जाए तो दिल्ली से अप-डाउन करने वालों में भी संक्रमण पाया गया। दोनों सीमाओं के जिला प्रशासन को काफी सख्ती करनी पड़ी। पहले लॉकडाउन था तो आदमी का फ्री मूवमेंट बंद था। आज फ्री मूवमेंट है, इसलिए अब सावधानी और सतर्क ता पहले की तुलना में ज्यादा आवश्यक है।
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