जन-शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। जिलों के बीच बेहतर करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। इसी का नतीजा रहा कि दिसंबर में अमेठी सहित छह जिले एक साथ टॉप-1 रैंक पर आए हैं। दूसरी ओर, प्रयागराज व आगरा जैसे बड़े जिलों में शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता की हिदायतों का खास फर्क नजर नहीं दिखा। दोनों जिले संयुक्त रूप से अंतिम पायदान पर हैं।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम लोगों की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। इसके लिए सीएम ऑफिस के अधिकारियों ने जिलों में निस्तारित शिकायतों की रैंडम जांच शुरू कराई। इसके आधार पर रैंकिंग में नंबर देने की शुरुआत हुई। मुख्य सचिव के स्तर पर भी निस्तारित शिकायतों की समीक्षा शुरू हुई। इसका बेहतर परिणाम सामने आया है। अमेठी, उन्नाव, फर्रुखाबाद, महोबा, शामली व हमीरपुर जिले गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित कर संयुक्त रूप से नंबर-1 रहे हैं। इसी तरह टॉप-10 में जिलों की संख्या 14 है। इनमें टॉप रैंक वाले छह जिलों के अलावा संतकबीरनगर को सातवीं, हरदोई व हापुड़ को आठवीं तथा प्रतापगढ़, बुलंदशहर, रामपुर, रायबरेली व वाराणसी को संयुक्त रूप से 10वीं रैंक मिली है।
लखनऊ 51 वें पायदान पर
लखनऊ में भी आम लोगों की शिकायतों के निस्तारण व गुणवत्ता की स्थिति संतोषजनक नहीं कही जा सकती। 75 जिलों में लखनऊ 51वें पायदान पर है। अवध के जिलों में रायबरेली की 10वीं, श्रावस्ती की 16वीं, गोंडा व बाराबंकी की 21वीं, सुल्तानपुर की 29वीं, बलरामपुर की 31वीं, अयोध्या की 59वीं, बहराइच व सीतापुर की 64वीं रैंक है।