प्रदेश सरकार अब शहरी क्षेत्र में दो तरह के नए शुल्क वसूलेगी । सरकार ने प्रस्तावित महायोजना में भू-उपयोग बदलने की दशा में पुराने निर्माणों को नियमित करने के लिए जहां 'नगरीय उपयोग प्रभार' लेने का निर्णय लिया है, वहीं, शहरी क्षेत्र में बेहतर अवस्थापना सुविधा से जुड़े क्षेत्रों में स्थित जमीन पर नक्शा पास करते समय विशेष सुविधा शुल्क लिया जाएगा। ये दोनों शुल्क विकास प्राधिकरणों द्वारा लिया जाएगा । इसके लिए आवास विभाग द्वारा तैयार किए गए 'उप्र नगर योजना और विकास अधिनियंम 1973 (संशोधन) अध्यादेश, 2023' को बुधवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है।
बता दें कि बसपा सरकार ने एक्ट में संशोधन करते हुए यह प्रावधान कर दिया था कि नई महायोजना बनने पर यदि जमीन का भू-उपयोग बदलता है तो उस जमीन पर बने निर्माण को बिना शुल्क लिए ही नियमित कर दिया जाएगा । इससे बड़ी संख्या में लोग विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से मिलीभगत करते दूसरे भू-उपयोग की भूमि पर आवासीय या व्यावयायिक निर्माण करा लेते थे और नई महायोजना में उसे नियमित करा लेते थे। इससे विकास प्राधिकरणों का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था । इसके मद्देनजर ही सरकार ने अब उस एक्ट में बदलाव के लिए यह नया अध्यादेश लेकर आई है।
दरअसल इस समय अमृत योजना से जुड़े प्रदेश के 59 शहरों के लिए जीआईएस आधारित महायोजना तैयार करने का काम हो रहा है । इसमें तमाम ऐसे निर्माण सामने आए हैं, जो भू-उपयोग के विपरीत बने हुए हैं । ऐसे निर्माणों की संख्या लाखों में है । इसके मद्देनजर ही सरकार ने संशोधित अध्यादेश में यह प्रावधान कर दिया गया है कि प्रस्तावित महायोजना में भू-उपयोग के विपरीत बने निर्माणों को नियमित करने के लिए विकास प्राधिकरणों द्वारा 'नगरीय उपयोग प्रभार' वसूला जाएगा। हालांकि प्रभार का दर बाद में बनने वाली नियमावली में तय की जाएगी।
विशेष सुविधा से जुड़े क्षेत्र में देना होगा सुख सुविधा शुल्क
इसके अलावा सरकार ने शहरों में मेट्रो, रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस), स्टेडियम, रिवर फ्रंट डवलपमेंट, बड़ी मेगा परियोजनाएं बड़े पार्क जैसी विशेष सुविधाओं से आच्छादित क्षेत्रों में 'विशेष सुख सुविधा शुल्क ' वसूलने का फैसला किया है ।
यानि विशिष्ट सुविधा से प्रभावित क्षेत्रों में स्थित भूमि पर नक्शा पास कराने के समय यह शुल्क देना होगा । मौजूदा व्यवस्था में सड़क, नाली, सीवर, विद्युत आपूर्ति व जलापूर्ति से आच्छादित क्षेत्रों में विकास शुल्क लिए जाने का प्रावधान है। प्रस्तावित विशेष सुख सुविधा शुल्क की दर तय करने के लिए आवास विभाग जल्द नियमावली बनाएगा।
इसके अलावा अध्यादेश में यह भी संशोधन किया गया है कि जरूरत के मुताबिक महायोजना को 10 वर्ष या इससे पूर्व भी पुनरीक्षित किया जा सकेगा । सरकार का मानना है कि विशेष सुख सुविधा लेने की व्यवस्था लागू होने से जहां विकास प्राधिकरणों की आय बढ़ेगी, वहीं वित्तीय संसाधनों में इजाफा होने से शहरों में अवस्थापना व जन सुविधाओं के विकास को बढ़ावा मिलेगा।