सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छह पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगलों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। कानून बनाकर पूर्व सीएम को ताउम्र सरकारी आवास में रहने की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए तैयार विधेयक के मसौदे को बुधवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त को लोक प्रहरी की याचिका पर प्रदेश के छह मुख्यमंत्रियों को दो माह में सरकारी बंगले खाली करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने प्रदेश सरकार की उस नियमावली को ही अवैध ठहराते हुए खारिज कर दिया था जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास आवंटित किए गए थे।
फैसले की प्रति मिलने के बाद से इसको लेकर शीर्ष स्तर पर मंथन चल रहा था। सरकार के सामने पूर्व सीएम के बंगले बचाने के लिए दो विकल्प थे- रिव्यू पिटीशन दाखिल करना या एक्ट बनाकर आवास आवंटन को कानूनी जामा पहनाना।
रिव्यू पिटीशन दाखिल करने में जोखिम था कि सर्वोच्च अदालत इसे स्वीकार करेगी या नहीं। स्वीकार करेगी भी तो कोई राहत देगी या नहीं। इसलिए, विधेयक लाकर पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास आवंटन के लिए एक्ट बनाने के विकल्प को सही माना गया।