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इमामबाड़े में पर्यटन बंद हो, शरई कानून लागू हो: जव्वाद

Sun, 07 Jun 2015 01:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड गठन व चेयरमैन की आड़ में अब हुसैनाबाद ट्रस्ट को निशाना बनाया जा रहा है। लंबे समय से हुसैनाबाद ट्रस्ट को लेकर सपा सरकार व प्रशासन से नाराज आसिफी मस्जिद के इमाम-ए-जुमा मौलाना कल्बे जव्वाद ने अब वक्फ बोर्ड के साथ हुसैनाबाद ट्रस्ट को भी निशाने पर ले लिया है।
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मौलाना का कहना है कि इमामबाड़े धार्मिक स्थल हैं इसलिए यहां शरई कानून लागू होना चाहिए।

कल्बे जव्वाद ने कहा है कि ऐतिहासिक आसिफी इमामबाड़ा धार्मिक स्थल है, कोई पर्यटन स्थल नहीं है। मौलाना ने कहा कि इमामबाड़े नवाब ने इबादत और जियारत के लिए बनवाए, पर्यटन के लिए नहीं। इसलिए इमामबाड़े में भी शरई कानून लागू होना चाहिए।

इमामबाड़े के पर्यटन पर रोक लगाई जाए

उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर में मुसलमानों के जाने पर रोक है, इस पर किसी को आपत्ति नहीं है। स्वर्ण मंदिर के अपने नियम कानून है किसी को ऐतराज नहीं है। फिर इमामबाड़ों में पर्यटन पर रोक पर आपत्ति क्यों उठ रही है।

उन्होंने कहा कि इमामबाड़ा, इबादत के लिए है तमाशे के लिए नहीं है, पर्यटक गैर शरई काम करते हैं, बे हिजाबी होती है और  शराब की बोतलें मिलती हैं। यह पूरी तरह शरीयत के खिलाफ है। इसलिए अब पर्यटन पर रोक लगाई जा रही है।

मौलाना ने ट्रस्ट की आमदनी पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार के लोगों के मुताबिक ट्रस्ट की आय रोजाना एक लाख रुपये से अधिक है तो फिर ट्रस्ट की सालाना आमदनी कम क्यों दिखाई जाती है। मौलाना ने कहा कि अब वक्फ की लड़ाई में हुसैनाबाद ट्रस्ट भी है।

तालाबंदी व प्रदर्शन से मायूस लौट रहे हैं पर्यटक

ऐतिहासिक धरोहर आसिफी इमामबाड़ा देखने की तमन्ना लिए पर्यटक लखनऊ आ रहे हैं लेकिन तालाबंदी व प्रदर्शन से मायूस होकर लौट हो रहे हैं।

शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के खिलाफ मौलाना कल्बे जव्वाद का विरोध थम नहीं रहा है और वक्फ की इस लड़ाई में ऐतिहासिक आसिफी इमामबाड़ा व छोटा इमामबाड़ा दांव पर लगा हुआ है।

शिया वक्फ बोर्ड के गठन के साथ ही शुरू हुए विरोध ने शुक्रवार से तूल पकड़ लिया है। ऐतिहासिक धरोहर छोटे इमामबाड़े से शुरू हुआ तालाबंदी व विरोध अब बड़े इमामबाड़े तक पहुंच गया है। मौलाना के समर्थक दोनों इमामबाड़ों पर ताला डाल कर प्रदेश सरकार व शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के खिलाफ नारेबाजी व प्रदर्शन कर रहे हैं।

शनिवार को भी तालाबंदी से देशभर से आए पर्यटक वापस लौट गए। इस दौरान पर्यटक काफी परेशान व नाराज हुए लेकिन बड़ा इमामबाड़ा व छोटे इमामबाड़े पर प्रदर्शनकारियों के आगे वे भी बेबस दिखे।
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इमामबाड़ों के आसपास सुरक्षा तक नहीं

इमामबाड़े बंद हैं, लेकिन पर्यटक बराबर यहां आ रहे हैं। गेट पर प्रदर्शनकारियों के बीच पर्यटक असुरक्षित सा महसूस कर रहे हैं क्योंकि बड़ा इमामबाड़ा व छोटे इमामबाड़े के आसपास सुरक्षा कर्मी नजर नहीं आ रहे हैं।

बड़ा इमामबाड़े के रूमी गेट चौकी पर भी दोपहर में पुलिस कर्मी नजर नहीं आए। वहीं छोटे इमामबाड़े में भी पुलिस कर्मी तैनात नहीं हैं। ऐसे में यहां आ रहे पर्यटक प्रदर्शन व आसपास सन्नाटे से घबराकर सीधे होटल वापस हो रहे हैं।

ट्रस्ट को रोजाना एक लाख रुपये से अधिक का नुकसान
ऐतिहासिक इमामबाड़ों पर ताला लगने से रोजाना हुसैनाबाद ट्रस्ट को एक लाख से अधिक का नुकसान हो रहा है। रोजाना तकरीबन 20 हजार पर्यटक इन ऐतिहासिक धरोहर को देखने आते हैं। 50 रुपये प्रति व्यक्ति का टिकट मूल्य है।

हुसैनाबाद ट्रस्ट के ओएसडी नासिर नकवी का कहना है कि प्रदर्शन से ट्रस्ट को लाखों का नुकसान हो रहा है। पर्यटक वापस हो रहे हैं और इमामबाड़ों में प्रदर्शन के चलते ऐतिहासिक पिक्चर गैलरी भी सूनी है। यहां भी पर्यटक नहीं आ रहे हैं।
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