लखनऊ। केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग में डॉक्टरों और निजी वेंडरों के बीच कमीशन के खेल का पर्दाफाश हुआ है। यह पर्दाफाश केजीएमयू की जांच रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग के कुछ डॉक्टर निजी सहायकों के जरिये मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं और लेंस खरीदने के लिए मजबूर कर रहे थे।
यह मामला तब प्रकाश में आया, जब गोरखपुर के एक मरीज ने मुख्यमंत्री पोर्टल और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से शिकायत की। आरोप था कि ओपीडी में बैठे एक बाहरी व्यक्ति ने मरीज को करीब 18,000 रुपये की दवाएं चौक स्थित एक निजी मेडिकल स्टोर से खरीदने का दबाव बनाया था।
इस पर हुई जांच में पुष्टि हुई कि आरोपी डॉक्टर ने एक निजी सहायक तैनात कर रखा था, जो सरकारी परचे पर बाहर की महंगी दवाएं और लेंस लिखता था। चार सदस्यीय जांच कमेटी ने गोरखपुर जाकर पीड़ितों के बयान दर्ज किए। पुराने 30 मरीजों में से 17 ने बाहर से सामान मंगवाने की पुष्टि की है।
मामले का खुलासा होते ही डॉक्टर का निजी सहायक फरार हो गया है। केजीएमयू प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।