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IITR REPORT: लखनऊ के इस इलाके की हवा सबसे जहरीली साथ ही शोर भी ज्यादा

Mon, 06 Nov 2017 12:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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चारबाग बाग में निर्माण कार्य की वजह से बढ़ा प्रदूषण - फोटो : amarujala
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रिहायशी इलाकों में इंदिरानगर की हवा सबसे ज्यादा जहरीली है। यहां सबसे ज्यादा शोरगुल भी है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) की रविवार को इंटरनेशनल टॉक्सिकोलॉजी कॉन्क्लेव में जारी पोस्ट मानसून रिपोर्ट-2017 में यह तथ्य सामने आया है। आईआईटीआर ने शहर के 9 रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में जांच के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है।
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इसके मुताबिक रिहायशी इलाके में इंदिरानगर के बाद अलीगंज और व्यावसायिक क्षेत्र में चारबाग, अमीनाबाद में सबसे अधिक वायु प्रदूषण है।  इंदिरानगर में सूक्ष्मतम कण पीएम10 का आंकड़ा 212.3 माइक्रोग्राम प्रति घनमी और पीएम 2.5 का आंकड़ा 103.1 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर 24 घंटे के औसत के रूप में मिला। व्यावसायिक इलाका होने के बाद भी चारबाग में पीएम10 का आंकड़ा 211.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5 127.6 माइक्रोग्राम प्रति घनमी रहा।

पीएम10 की पूरे समय में अधिकतम मात्रा अमीनाबाद में 358.4 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और पीएम 2.5 की मात्रा चारबाग में 166.4 माइक्रोग्राम प्रति घनमी पाई गई। यह नेशनल एयर एंबिएंट क्वालिटी एंड स्टैंडर्ड्स के मानक से तीन गुना तक अधिक है। 
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नैक्स के मुताबिक 24 घंटे के औसत में पीएम10 के लिए अधिकतम मानक 100 और पीएम2.5 के लिए 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमी होना चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों की तुलना करें तो पीएम10 और पीएम 2.5 दोनों ही चार गुना से अधिक शहर की हवा में मिले हैं। हालांकि, भारत में अभी नैक्स के मानकों को ही माना जाता है। हैवी मेटल्स भी हवा में आईआईटीआर को मिले हैं लेकिन यह नैक्स के मानकों से कम ही हैं।

जानिए, प्रदूषण की वजह

डेमो - फोटो : डेमो
आईआईटीआर की लगातार तीसरे साल की पोस्ट मानसून रिपोर्ट में इंदिरानगर की हवा सबसे अधिक जहरीली मिली है। आईआईटीआर के वैज्ञानिक इसे खतरे की घंटी मान रहे हैं। रिहायशी इलाका होने के बाद भी यहां वायु प्रदूषण अधिक मिलना चिंताजनक है।

आवास विकास परिषद की लापरवाही से चल रही आवासीय में कॉमर्शियल गतिविधियां, रिंगरोड पर लगने वाले दिनभर जाम, इसे और अधिक खतरनाक बना रहे हैं। यहां प्रदूषण को कम करने की जगह स्थानीय लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। पिछले साल की तुलना में गोमतीनगर, अलीगंज, चारबाग और अमीनाबाद में जहां वायु प्रदूषण बढ़ा है, वहीं इंदिरानगर में मामूली कमी आई है। 

यहां से लिए गए आंकड़े
आवासीय : अलीगंज, विकासनगर, इंदिरानगर, गोमतीनगर।
व्यावसायिक : चारबाग, आलमबाग, अमीनाबाद, चौक।
औद्योगिक : आमौसी इंडस्ट्रियल एरिया

जानिए, प्रदूषण की वजह
-मेट्रो का निर्माण कार्य
-वाहनों की संख्या बढ़ना
-डीजल-पेट्रोल की अधिक खपत
-हरियाली की कमी
-प्रदूषण फै लाने वाले वाहन पर नियंत्रण की कमी
- दीपावली पर छोड़े पटाखे
-ट्रैफिक जाम व आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां​

वैज्ञानिकों की सिफारिशें
- मैट्रो के काम में वायु प्रदूषण की निगरानी हो
- ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर हो
- अतिक्रमण अभियान प्रभावी तरीके से चले
- प्रदूषण के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जाए
- कूड़ा न जलने दिया जाए
- फुटपाथ खाली हों
- विद्युत शवदाह गृह का उपयोग बढ़े
- डीजल पर निर्भरता घटाने की जरूरत
- पार्किंग शुल्क को घंटों के हिसाब से बढ़ाकर निजी वाहनों के उपयोग को घटाया जाए

 

पढ़ें, हवा में किस तरह घुल रहा जहर

डेमो - फोटो : अमर उजाला


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छह फीसदी वाहन बढ़े, 26 फीसदी बढ़ा ईंधन खर्च 

डेमो
आरटीओ से मिले आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में वाहनों की संख्या पिछले साल की तुलना में 6.10 फीसदी बढ़ी है। ऐसे में वाहनों की संख्या अब बढ़कर लखनऊ में 19,78,345 हो गई। वहीं ईंधन खर्च के आंकड़े देखें तो पिछले साल की तुलना में पेट्रोल की खपत में 11.36 फीसदी, डीजल की 26.38 फीसदी और सीएनजी की 6.24 फीसदी का इजाफा हुआ है।

सर्वे करने वाली टीम में प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एससी बर्मन के साथ डॉ. जीसी किसकू, एएच खान, डॉ. ज्योत्सना सिंह, ताजुद्दीन अहमद, प्रदीप शुक्ला, खलील अहमद, बीएम पांडेय, प्रिया सक्सेना, हामिद कमाल, अंकुर दीक्षित, मो. इरफान, रिद्धि राय शामिल रहे।

पोस्ट मानसून रिपोर्ट-2017 के मुताबिक, हवा मानकों से अधिक प्रदूषित है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी का अधिक उपयोग हवा में जहरीले तत्व छोड़ रहा है। इसकी वजह से सूक्ष्मतम कण और नए तरह के प्रदूषण फैलाने वाले तत्व हवा में मिल रहे हैं। कई कण तो पूरी तरह पारदर्शी हैं, जिनका अध्ययन आईआईटीआर के वैज्ञानिक कर रहे हैं। जरूरत है कि वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण जैसे मुद्दों पर गंभीर हुआ जाए। आईआईटीआर का पिछले कई सालों का डाटाबेस इसमें मददगार हो सकता है।
- प्रो. आलोक धवन, निदेशक, आईआईटीआर

 
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