संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी में 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर लगाया गया है। बुधवार को इसमें आईआईटी विद्यार्थी, टीचर और उनके पारिवारिक सदस्यों ने भाग लिया।
आईआईटी कानपुर ने संस्कृत की एक वेबसाइट भी बनाई है। हालांकि वेबसाइट का नाम अभी नहीं खोला है, लेकिन जल्द ही इस वेबसाइट को आईआईटी की मुख्य वेबसाइट वेबसाइट www.iitk.ac.in से लिंक करा दिया जाएगा।
विवेकानंद समिति और संस्कृत भारती की ओर से आईआईटी में 10 दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर चल रहा है। आठ जनवरी तक चलने वाले शिविर में आईआईटी के 65 विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। तमाम प्रोफेसर और उनके पारिवारिक सदस्य संस्कृत पढ़ने, बोलने का गुर सीख रहे हैं।
व्याकरण की बारीक जानकारी ले रहे हैं। संस्कृत भारती के डॉ. ओंकार नारायण दुबे और कानपुर प्रांत के संपर्क प्रमुख प्रकाश झा शिक्षक बने हैं। आईआईटी के प्रफुल्ल पोखरा ने बताया कि संस्कृत संभाषण शिविर सफल रहा है।
लोग संस्कृत से लगाव रखते है। उसे पढ़ना, समझना और सीखना चाहते हैं। अब जरूरत सही ढंग से प्रचार-प्रसार करने की है। विज्ञानी और इंजीनियर भी संस्कृत प्रति आकर्षित हैं। इस आकर्षण को ज्ञान में परिवर्तित करने की जरूरत है।
इसके लिए ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षण शिविर लगाए जाने चाहिए। आईआईटियंस का मानना है कि संस्कृत संयमित जीवन और भारतीय शास्त्र का ज्ञान कराती है। वेद, उपनिषद, शास्त्र, रामायण और महाभारत का मूल संस्करण संस्कृत में ही लिखा गया है।