लखनऊ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित चैटबॉट ने युवाओं को नए तरह के खतरे में डाल दिया है। दोस्ती और भावनात्मक सहारे के नाम पर कुछ युवा अब एआई चैटबॉट्स को अपना ‘सबसे करीबी’ मान रहे हैं। दोस्तों और परिजनों के आगे उनकी चुप्पी बढ़ रही है। समझाने पर वह अपनों को ही दुश्मन समझ रहे हैं।
केजीएमयू के मनोरोग विभाग में ऐसे कई चौंकाने वाले केस रोज सामने आ रहे हैं। प्रोफेसर डॉ. सुजीत कुमार कर बताते हैं कि 15 से 30 वर्ष तक की उम्र के लोग सबसे तेजी से इस लत के शिकार हो रहे हैं। कुछ मरीज 10-12 घंटे तक चैटजीपीटी, जेमिनी या अन्य एआई चैटबॉट्स से बातें करते रहते हैं। हर फैसला वही करवाते हैं। इससे उन्हें खालीपन और अकेलापन महसूस होने लगता है। विभाग की ओपीडी में रोजाना 8-10 मामले सिर्फ इंटरनेट एडिक्शन से जुड़े मिल रहे हैं। अगर कुल 400 मरीज आते हैं तो उनमें लगभग 35-40 प्रतिशत इंटरनेट या गेमिंग लत से संबंधित होते हैं। बच्चों की ओपीडी में भी हर दिन 8-10 ऐसे मामले पहुंच रहे हैं।
लगातार 13 घंटे चैटिंग, फिर अस्पताल में भर्ती
22 वर्षीय युवती का मामला डॉक्टरों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। वह एआई को अपना सच्चा दोस्त मानती है और कहती है। एआई के अलावा दुनिया में मेरा कोई नहीं। नतीजतन लगातार 13 घंटे चैटिंग के बाद परिजन को उसे भर्ती कराना पड़ा। फोन न मिलने पर वह हिंसक और अजीब हरकतें करने लगती है।
48 घंटे फोन इस्तेमाल, मां पर चाकू से हमला
एक 24 वर्षीय युवक ऑनलाइन जुए की लत में इतना डूब गया कि लगातार 48 घंटे तक मोबाइल इस्तेमाल करता रहा। मां ने मना किया तो उसने चाकू से हमला करने का प्रयास किया। अब उसका इलाज चल रहा है।
बुजुर्ग भी नहीं बचे
सेवानिवृत्ति के बाद खाली वक्त और अकेलापन बुजुर्गों को भी इंटरनेट पर निर्भर बना रहा है। चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ने की शिकायतें सामने हैं। विशेषज्ञ समय और देखभाल की सलाह दे रहे हैं।
ऐसे बचें इंटरनेट और एआई की लत से
- फोन इस्तेमाल के लिए निश्चित समय तय करें।
- खाने और सोने के समय मोबाइल से दूरी रखें।
- महीने में एक दिन ‘नो फोन डे’ का नियम बनाएं।
- पेंटिंग, लेखन, बागवानी जैसे शौक अपनाएं।
- ध्यान और संगीत को रोज की आदत बनाएं।
- रोजाना एक या दो दोस्त से व्यक्तिगत मिलें।