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Lucknow News: बढ़े आवागमन के संसाधन तो विकास को लगे पंख

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आशुतोष पाठक
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इकौना (श्रावस्ती)। जिले के चहुंमुखी विकास की राह में आवागमन के संसाधनों का अभाव रोड़ा है। पर्यटन की अपार संभावना के बाद भी संसाधनों के अभाव में तराई निखर नहीं पा रही है। जिसे बढ़ाने की मांग लगातार हो रही है।
श्रावस्ती को बौद्ध तपोस्थली होने के साथ ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पुत्र कुश की राजधानी व जैन तीर्थंकर संभवनाथ की जन्मस्थली होने का भी गौरव हासिल है। भिनगा, ककरदरी, हरदत्त नगर गिरंट व सोहेलवा जंगल क्षेत्र होने के साथ ही यहां शिवालिक पर्वत मालाएं भी पर्यटन को पंख लगा रही है। वहीं दूसरी तरफ जिले से सटे बलरामपुर के देवीपाटन, बहराइच में सय्यद सालार मसूद गाजी की दरगाह व सोनवा के दिकौली में बड़े पुरुष की मजार भी आस्था व पर्यटन के क्षेत्र में विशेष पहचान रखती है। यहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक व अनुयायी आते हैं। लेकिन जानकारी व संसाधनों के अभाव में एक ही स्थान तक सीमित रह जा रहे हैं। इससे जहां जिला पर्यटन के क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं कर पा रहा है। वहीं पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद जिले का चहुंमुखी विकास नहीं हो पा रहा है।
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यह है पर्यटन व रमणीय स्थल

सिरसिया क्षेत्र में शिवालिक पर्वत मालाएं, सुहेलदेव वन्य जीव प्रभाग, जंगल के मध्य स्थित पहाड़ी नाले, पांडव कालीन विभूति नाथ मंदिर, रजिया ताल, जमुनहा का राप्ती बैराज, जगपति धाम मंदिर, भिनगा जंगल के मध्य भदिला ताल, इकौना के सीताद्वार स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम, माता जानकी मंदिर, सीताद्वार झील, लवकुश पार्क, गिलौला में सैकड़ों बीघा भूमि में फैला सकरैल तालाब, बौद्ध तपोस्थली, जैन मंदिर, अंगुलिमाल स्तूप व बनीनाथ महादेव मंदिर सहित कई अन्य रमणीय व पर्यटन स्थल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
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यह है दुश्वारी
जिले में रेल लाइन नहीं है। न ही परिवहन निगम का डिपो है। भिनगा बस अड्डे से सात बसों का ही संचालन है। इकौना व गिलौला में बने बस अड्डे पर बस नहीं आती। कटरा में पीपीपी मॉडल पर बनने वाला बस अड्डा भी नहीं बना। बौद्ध परिपथ व भिनगा-बहराइच मार्ग पर ही निगम की बस संचालित है। इकौना, गिलौला व जमुनहा क्षेत्र से भिनगा के लिए कोई सीधी बस सेवा नहीं है। इन क्षेत्र के लोगों को मुख्यालय आने के लिए बहराइच अथवा डग्गामार या फिर निजी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। भिनगा व जमुनहा संबद्ध मार्गों पर निजी बसों का संचालन हो रहा है। जो बिना सवारी पूरी हुए गंतव्य तक नहीं ले जाती।
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