लखनऊ। हुसैनगंज की शंकरपुरी कॉलोनी में जिस जर्जर जाली वाले गेट की पेटी ने 27 जुलाई को मासूम फहद की जान ले ली, शहर से गांव तक प्रमुख मार्ग और पगडंडी पर अनगिनत उसी तरह से जर्जर घेराबंदी वाले ट्रांसफार्मर पेटी के साथ रखे हैं। जो आमजन के लिए खतरा बन रहे हैं। फिर भी पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने उनका मेंटेनेंस करने के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं की है। इसीलिए राजधानी के बिजली अफसर भी पूरी तरह से ऐसे ट्रांसफार्मर-पेटी की जर्जर घेराबंदी दुरुस्त कराने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
उपकेंद्र कर्मियों ने बताया कि जर्जर घेराबंदी वाले ट्रांसफार्मर-पेटी काफी तादाद में हैं। बिजली विभाग ने इनके मेंटेनेंस के मद में बजट का प्रावधान नहीं किया है। इसके कारण घेराबंदी की जो जाली टूट जाती है, उसे बदलने में आर्थिक संकट सामने आ जाता है। हालांकि, फहद की मौत के बाद सहादतगंज, राजाजीपुरम, आलमबाग, आशियाना, सीतापुर रोड, त्रिवेणीनगर, निरालानगर, चिनहट आदि इलाकों में 125 से ज्यादा जर्जर घेराबंदी वाले ट्रांसफार्मर-पेटी को दुरुस्त किया गया है। यह काम ठेकेदारों ने किया, जिनका भुगतान बाद में होगा।
प्रबंध निदेशक को भेजेंगे प्रस्ताव
गोमतीनगर जोन के मुख्य अभियंता सुशील गर्ग ने बताया कि जर्जर घेराबंदी वाले ट्रांसफार्मर-पेटी को सूचीबद्ध किया जा रहा है। इन पर खर्च होनी वाली रकम का आकलन करके मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक को प्रस्ताव भेजेंगे। उम्मीद है कि प्रस्ताव पर बजट का आवंटन होगा, जिससे जर्जर घेराबंदी वाले ट्रांसफार्मर-पेटी की दशा सुधर सकेगी।
खुले में रखे ट्रांसफार्मर।
खुले में रखे ट्रांसफार्मर।
खुले में रखे ट्रांसफार्मर।