आय में बढ़ोतरी को लेकर नगर निगम की ओर से पूर्व में इसका प्रस्ताव भी चतुर्थ राज्य वित्त आयोग को दिया गया है।
गृहकर निर्धारण कराने वाले भवनस्वामियों को अब यह भी बताना होगा कि उनके घर के सामने फुटपाथ व सड़क पर कितने चार पहिया वाहन खड़े होते हैं।
यह जानकारी आवासीय व अनावासीय दोनों तरह के भवन स्वामियों को देनी होगी। वाहनों के बारे में इस तरह की जानकारी नगर निगम ने पहली बार मांगी है।
नगर निगम की यह तैयारी आने वाले दिनों में घर के बाहर फुटपाथ और सड़क पर वाहन खड़ा करने वालों पर लगाए जाने वाले टैक्स को लेकर देखी जा रही है।
आय में बढ़ोतरी को लेकर नगर निगम की ओर से पूर्व में इसका प्रस्ताव भी चतुर्थ राज्य वित्त आयेाग को दिया गया है।
चार दिन पहले नगर निगम प्रशासन ने गृहकर निर्धारण की नई फार्म बुकलेट जारी की है।
इसमें दिए गए फार्म में इस बार भवन स्वामियों से भवन के ब्यौरे के अलावा यह जानकारी भी मांगी गई है कि उनके भवन के सामने कितने चार पहिया वाहन सड़क व फुटपाथ पर खड़े होते हैं।
नगर निगम ने यह बुकलेट अनावासीय (व्यावसायिक) सम्पत्तियों के गृहकर निर्धारण की नई नियमावली लागू किए जाने के बाद जारी की है।
वहीं, घर के सामने सड़क व फुटपाथ पर गाड़ी खड़ी करने वालों पर टैक्स लगाने की तैयारी नगर निगम प्रशासन कई साल से कर रहा है। इसको लेकर शासन में प्रस्ताव भी भेजा गया।
दो माह पूर्व महापौर डा. दिनेश शर्मा की ओर से भी नगर निगम की आय में बढ़ोतरी को लेकर यह प्रस्ताव दिया गया था।
ऐसे में अब नगर निगम प्रशासन द्वारा भवनस्वामियों से यह जानकारी मांगना कि उनके घर के सामने कितने चार पहिया वाहन खड़े होते हैं प्रस्ताव पर अमल की तैयारी की ओर इशारा कर रहा है।
उधर, महापौर की ओर से चतुर्थ राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष को जो प्रस्ताव दो महीने पहले सौंपा गया था। उसमें कहा गया था कि शहर में करीब 12 लाख वाहन हैं।
इनमें से करीब एक लाख वाहन सड़क पर ही खड़े किए जाते हैं। यदि ऐसे वाहनों पर दस रुपए प्रतिमाह प्रति वाहन शुल्क लिया जाए तो हर साल करीब 36 करोड़ रुपए की होगी।
प्रस्ताव को लागू करने को लेकर महापौर की ओर से राज्य वित्त आयोग के प्रदेश अध्यक्ष अतुल कुमार गुप्ता से यह
मांग भी की गई थी।
इसके लिए नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर प्राविधान किया जाए क्योंकि बिना अधिनियम में प्राविधान किए ऐसा नहीं किया जा सकता।