शासन के वरिष्ठ अफसरों की नाफरमानी से नाराज मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने उन 15 विभागों की समीक्षा करने से ही इंकार कर दिया जिनके वरिष्ठतम अधिकारी बैठकों में नहीं आए थे। ऐसे अफसरों को भविष्य में स्वयं बैठकों में आने की हिदायत दी गई है। मुख्य सचिव के इस कदम से ब्यूरोक्रेसी में तरह-तरह की चर्चा हो रही है।
दरअसल, नियोजन विभाग शासन के समस्त विभागों की बजट के सापेक्ष वितीय स्वीकृतियों और स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष खर्च का लेखाजोखा रखता है। यही विभाग समय-समय पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठकें आयोजित कर बजट स्वीकृतियों व खर्चों की समीक्षा कराता है ताकि बजट समय से खर्च होता रहे और योजनाओं व परियोजनाओं का लाभ लोगों को समय से मिल सके।वर्तमान में तमाम विभागों की बजट खर्च की स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में विभाग ने बीते 29 अक्तूबर को भी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वितीय स्वीकृतियों व खर्चों की समीक्षा बैठक आयोजित की थी। मुख्य सचिव की बैठक थी और वित से जुड़े विषय पर चर्चा होनी थी लिहाजा विभाग को नेतृत्व दे रहे अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व सचिवों को ही इस बैठक में भाग लेना था। मगर, पूर्व की दूसरी तमाम बैठकों की तरह कई विभागों के वरिष्ठतम अधिकारी इस बैठक में भी नहीं आए। मामला यहीं से गंभीर हो गया। मुख्य सचिव ने वितीय समीक्षा बैठकों की गंभीरता व संवेदनशीलता का हवाला देते हुए वरिष्ठतम अफसरों द्वारा प्रतिभाग न किए जाने वाले विभागों की समीक्षा नहीं की और इसे बैठक की प्रोसीडिंग में दर्ज करवा दिया।
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भविष्य में वरिष्ठतम अफसरों को ही बैठक में आने की हिदायत
प्रमुख सचिव नियोजन आमोद कुमार की ओर से इस बैठक में मुख्य सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों पर कार्यवाही से संबंधित निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें न सिर्फ ऐसे विभागों की समीक्षा न किए जाने की वजह दर्ज है बल्कि वरिष्ठतम अधिकारियों को भविष्य के लिए दी गई नसीहत भी है। मुख्य सचिव ने आदेशित किया है बैठकों की गंभीरता व संवेदनशीलता के दृष्टिगत विभागों के वरिष्ठतम अधिकारियों द्वारा ही बैठक में प्रतिभाग किया जाए।
इन विभागों के वरिष्ठतम अफसर रहे गैरहाजिर
पंचायती राज
ग्राम्य विकास
खाद्य एवं रसद
कृषि
न्याय
उच्च शिक्षा
महिला कल्याण
अल्पसंख्यक कल्याण
नागरिक उड्डयन
होमगार्ड
आयुष
वाणिज्य कर
सचिवालय प्रशासन
कारागार प्रशासन एवं सुधार
व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास