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डॉक्टर बोले- बुखार के साथ ही प्लेटलेट्स लगातार गिरें तो कराएं ये जांच

Mon, 23 Sep 2019 01:18 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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आमतौर पर बुखार होने पर मरीजों में लाल रक्त कणिकाएं(आरबीसी), सफेद रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) और प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं। पर, ऐसी स्थिति लगातार बने रहना साइटोपीनिया की वजह से भी हो सकता है। यह बातें डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एके त्रिपाठी ने कही। वह अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में यूपी चैप्टर ऑफ एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित यूपी एपिकॉन 2019 को संबोधित कर रहे थे।
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साइटोपीनिया है क्या
हमारे खून में तीन मुख्य भाग होते हैं। पहला-लाल रक्त कणिकाएं जिनका मुख्य काम पूरे शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुंचाना है। दूसरा- श्वेत रक्त कणिकाएं यानी हमारे शरीर की सैनिक जो संक्रमण और बैक्टीरिया से लड़ती हैं। तीसरा-प्लेटलेट्स जो कि खून के थक्का बनने में मददगार होती हैं।

साइटोपीनिया की स्थिति में एक या उससे ज्यादा रक्त के अहम अवयवों का स्तर नीचे गिरता जाता है। साइटोपीनिया के एक प्रकार यानी एनीमिया को हम सभी जानते हैं। ऐसे ही ल्यूकोपीनिया होता है जिसमें श्वेत रक्त कणिकाओं का स्तर गिरता है। थ्राम्बोसाइटोपीनिया में प्लेटलेट्स तो पैंसीटोपीनिया में इन तीनों जरूरी अवयवों की कमी होती है।
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प्रो. त्रिपाठी एवं डॉ सरिता बजाज - फोटो : amar ujala
क्या करें
प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि अगर लगातार स्थिति लगातार बनी रहे तो विटामिन बी-12 की जांच करानी चाहिए।

फास्ट फूड से मोटापे की चपेट में आ रहे बच्चे
डॉ. सरिता बजाज ने स्कूली बच्चों में मोटापे पर किए शोध का हवाला दिया। बताया कि चार सरकारी व चार प्राइवेट स्कूल के 12000 बच्चों पर हुए शोध में पाया गया कि 19 प्रतिशत छात्र- छात्राओं में मोटापे की समस्या है। इसका मूल कारण फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन और खेलकूद में रुचि न होना है।

चिकित्सा छात्रों को मिले अवॉर्ड
कार्यक्रम के दौरान पीजी और यूजी के विद्यार्थियों को बीच क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। डॉ. केके सावलानी, डॉ. एससी चौधरी की निगरानी में हुई क्विज प्रतियोगिता में डॉ. एसएन गुप्ता अवॉर्ड में प्रथम पुरस्कार डॉ. अंकुर गुप्ता, द्वितीय डॉ. विवेक भगत एवं तृतीय इमरान खान को मिला। इसी तरह डॉ एनएन गुप्ता अवार्ड में प्रथम पुरस्कार डॉ. दिव्या सरीन, द्वितीय डॉ वनिषा पुंडीर एवं तृतीय डॉ. अभिषेक टंडन को मिला। डॉ. वेदान गुप्ता अवार्ड में प्रथम पुरस्कार डॉ. ज्ञान प्रकाश, द्वितीय डॉ मोनिका कुलकर्णी व तृतीय डॉ अर्पित बंसल को एवं डॉ. जीपी एल्हेंस अवॉर्ड में प्रथम पुरस्कार डॉ. नाहिद, द्वितीय डॉ. अंकिता सिंह, तृतीय डॉ. क्षितिज प्रसाद को मिला।
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प्रोटीन-बैक्टीरिया से एचआईवी का इलाज

डॉ डी हिमांशु एवं प्रो. अनुपम वाखलु - फोटो : amar ujala
नए शोध और दवाओं के आने से एचआईवी का इलाज काफी आसान हो रहा है। एचआईवी का वायरस ब्रेन में छुपा हुआ रहता है। प्रोटीन और कुछ बैक्टीरिया केजरिए इसे गतिशील बनाने में सफलता मिली है। जब यह गतिशील होता है तो उसकी स्थिति का पता चलने पर दवाएं तय करने में काफी सहूलियत मिलेती है। इस दिशा में शोध को काफी हद तक सफलता मिली है। इसी तरह डब्ल्यूएचओ की ओर से एक नई दवा की संस्तुति की गई है, जो ब्रेन में छुपे वायरस को हटाने में कारगर साबित हो रही है। - डॉ. डी हिमांशु, आयोजन सचिव

कैल्शियम व विटामिन डी-थ्री का सेवन बढ़ाएं

उम्र बढ़ने और मासिक बंद होने के बाद महिलाओं को हड़्िडयों की खासतौर से देखभाल की जरूरत होती है। भोजन में कैल्शियम, विटामिन डी-थ्री का सेवन बढ़ाने के साथ ही नियमित व्यायाम जरूरी होता है। वहीं कोई मरीज लंबे समय से बिस्तर पर हैं तो बोन लॉस की वजह से ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में यदि वह शराब-तंबाकू का सेवन करता है तो हड्डी टूटने की आशंका और बढ़ जाती है।
- प्रो. अनुपम वाखलू, विभागाध्यक्ष गठिया रोग विभाग
 
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