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Lucknow News: यदि बेअसर साबित हो रही हैं बीपी की दवाएं...जीवनशैली बदलिए जनाब

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प्रतीकात्मक तस्वीर। 
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लखनऊ। कई दवाओं का संयोजन भी आधे से अधिक रोगियों का रक्तचाप (बीपी) नियंत्रित नहीं कर पा रहा है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में 18 महीने के दौरान 94 मरीजों पर हुए अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। ऐसे मरीजों को जीवनशैली संबंधी बदलाव करने के सुझाव दिए गए हैं। इस अध्ययन को राष्ट्रीय जर्नल में स्थान मिला है।
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अध्ययनकर्ता प्रो. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि उपचार-प्रतिरोधी उच्च रक्तचाप (रेसिस्टेंट हाइपरटेंशन) तब होता है जब तीन अलग-अलग वर्ग की रक्तचाप नियंत्रक दवाओं के उपयोग के बाद भी बीपी नियंत्रित न हो। ऐसे मरीजों में हृदयाघात, स्ट्रोक और किडनी फेल होने का जोखिम सामान्य मरीजों की तुलना में अधिक होता है। इसको देखते हुए उपचार-प्रतिरोधी उच्च रक्तचाप के 94 मरीजों पर चार दवाओं के संयोजन के प्रभाव का अध्ययन किया गया। मरीजों की औसत आयु करीब 55 वर्ष रही, जिनमें लगभग 64 फीसदी पुरुष प्रतिभागी थे। इन मरीजों पर चार दवाओं के संयोजन का उपयोग करने के बावजूद 12 सप्ताह के इलाज के बाद केवल 42.6 फीसदी मरीजों का रक्तचाप लक्ष्य स्तर तक पहुंच सका। यह अध्ययन कार्डियोलॉजी और फार्माकोलॉजी विभाग ने संयुक्त रूप से किया। इसमें डॉ. स्निग्धा स्वगतिका, डॉ. अर्पिता सिंह, डॉ. भुवन चंद्र तिवारी, डॉ. आशीष झा, डॉ. अतुल जैन, डॉ. पूजा शुक्ला, डॉ. गोविंद मिश्रा और डॉ. अरविंद सिंह शामिल रहे।

रक्तचाप नियंत्रित न हो तो ये करें
प्रो. भुवन चंद्र तिवारी के अनुसार अगर दवाओं के बावजूद रक्तचाप नियंत्रित न हो तो नियमित फॉलोअप, नमक का सीमित सेवन और वजन नियंत्रण जैसी जीवनशैली संबंधी रणनीतियां भी जरूरी हैं। शारीरिक गतिविधि और तनाव प्रबंधन भी इसमें सहायक होते हैं।
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लखनऊ में बढ़ रहा उच्च रक्तचाप का बोझ
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार लखनऊ में 30 वर्ष से ऊपर के लगभग हर तीसरे व्यक्ति को बीपी की समस्या है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से अधिक है। एक सामुदायिक अध्ययन में लखनऊ के शहरी इलाकों के 29 फीसदी लोगों में हाइपरटेंशन पाया गया।
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उच्च रक्तचाप के कारण :
असंतुलित आहार, व्यायाम न करना, वजन का तेजी से बढ़ना, तनाव, शराब और तंबाकू (सिगरेट) का अत्यधिक सेवन, शुगर (डायबिटीज), किडनी की बीमारी या स्लीप एपनिया।

बचाव के उपाय : नमक का कम सेवन, नियमित व्यायाम, योग या साइकिलिंग, संतुलित आहार, तनाव से दूर रहना, धूम्रपान और शराब से दूरी।
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