लखनऊ। निजी अस्पतालों में एमबीबीएस के बजाय दूसरी विधा के डॉक्टर मरीजों का इलाज करते मिले तो नकेल कसी जाएगी। इसे लेकर डीजी परिवार कल्याण ने निगरानी के निर्देश दिए हैं। यही नहीं, आईसीयू व वेंटीलेटर यूनिट का संचालन भी दूसरी विधा के डॉक्टर नहीं करेंगे।
राजधानी में करीब एक हजार निजी अस्पताल हैं। हर अस्पताल संचालक ने अपने पंजीकरण-नवीनीकरण में एमबीबीएस डॉक्टर की डिग्री फुल टाइम लगा रखी है, जबकि मौके पर एमबीबीएस के बजाय दूसरी विधा के डॉक्टर इलाज करते मिलते हैं। यहां तक आईसीयू व वेंटिलेटर यूनिट का संचालन भी दूसरी विधा के डॉक्टरों से कराया जा रहा है। ऐसे में डीजी परिवार कल्याण ने सीएमओ को निजी अस्पतालों की निगरानी के निर्देश दिए हैं। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि कमेटी बनाकर निजी अस्पतालों की जांच कराई जाएगी। जांच में एमबीबीएस की जगह दूसरी विधा के डॉक्टर मिले तो नोटिस जारी कर कार्रवाई होगी। संचालन पर भी रोक लगेगी।
हाल की जांच में कुशल डॉक्टर नहीं मिले
निगोहां दयालपुर के मजरा परमेश्वरखेड़ा निवासी मजदूर शैलेंद्र कुमार की पत्नी प्रेमलता (26) को डिलीवरी के लिए 18 अगस्त को डेट मिली थी। इस दौरान पारस अस्पताल में कोई भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं थीं। बीएमएस डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए भेज दिया था। जांच में बच्चा उल्टा था और गर्भनाल गर्दन में फंसा हुआ था। ऐसे में सिजेरियन ऑपरेशन होना था। अस्पताल प्रशासन ने प्रसव की डेट बीतने के बाद भी सिजेरियन नहीं कराया। इससे गर्भवती को ब्लीडिंग शुरू हो गई। हायर सेंटर पहुंचने से पहले उनकी मौत हो गई।