राही ने राजस्व परिषद में बिना कार्य के वेतन ग्रहण न करने का अनुरोध पत्र भी उच्चाधिकारियों को भेजा था। इसके बाद आवंटित सीमित कार्य के लिए भी उन्हें प्रोग्रामर उपलब्ध नहीं कराया गया। आय प्रमाणपत्र से संबंधित शासनादेशों में विरोधाभास और ओबीसी नॉन क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र में सेवा वर्ग के स्पष्ट उल्लेख के अभाव जैसे आवश्यक सुधारों के संबंध में भी पत्रावलियां प्रारंभ नहीं की गईं।
आईएएस एसोसिएशन पर साथ न देने का आरोप
राही ने आईएएस एसोसिशन पर साथ न देने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने आईएएस अधिकारियों के वाट्सएप ग्रुप पर मंगलवार को लिखा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा संघ से अपने निष्कासन की प्रक्रिया क्या है, जबकि इस बीच उनकी यह प्रार्थना लंबित है कि उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से मुक्त होकर सामाजिक कल्याण विभाग में अपने पूर्व कनिष्ठ पद पर पुनः कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी जाए। यह निवेदन संघ द्वारा मेरे जैसे कनिष्ठ अधिकारियों के नैतिक तथा कर्तव्यनिष्ठ चिंताओं के प्रति निरंतर प्रदर्शित उदासीनता के परिप्रेक्ष्य में किया जा रहा है। यह संस्थागत अंतरात्मा के क्रमिक क्षरण को दर्शाती है तथा उस संवैधानिक नैतिकता को कमजोर करती है, जिसे यह सेवा अपने आचरण और कार्य में धारण करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पिता बोले- रिंकू ने कभी आदर्शों से समझौता नहीं किया
आईएएस रिंकू सिंह राही के इस्तीफे की खबर से परिजन स्तब्ध हैं। पिता सौदान सिंह राही ने कहा कि रिंकू ने सदैव ईमानदारी की राह चुनी। पिता ने बताया कि रिंकू को कई बार करोड़ों रुपयों के प्रलोभन दिए गए, लेकिन उन्होंने कभी अपने आदशों से समझौता नहीं किया।