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Lucknow News: मैंने आत्मकथा नहीं, बस अपना बचपन लिखा ः दीप्ति नवल

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लखनऊ। मैंने कोई आत्मकथा नहीं लिखी। ऐसा नहीं कि आज बचपन को लिख दिया, तो कल कॉलेज लाइफ के बारे में या उसके बाद के पलों को शब्दों में सहेजूंगी। दरअसल मुझे लगा कि मेरी लाइफ के बारे में जो सबसे ज्यादा साझा करने वाली चीज है, वो है मेरा बचपन। मेरी किताब को मैंने एक सेलिब्रिटी के रूप में नहीं बल्कि एक लेखक के तौर पर लिखा है। अभिनेत्री व अ कंट्री कॉल्ड चाइल्डहुड की लेखिका दीप्ति नवल ने ये बातें यतीन्द्र मिश्र के साथ संवाद के दौरान कहीं। फिक्की फ्लो केआमंत्रण पर वे सोमवार को शहर में थीं। इस दौरान फिक्की फ्लो लखनऊ चैप्टर की चेयरपर्सन सिमू घई समेत अन्य मौजूद रहे।
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गोमतीनगर के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में दीप्ति नवल ने कहा कि जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि आपको अफसोस होता है, पर कई बार आत्मसंतुष्टि भी मिलती है। बचपन के किस्से पर उन्होंने कहा कि मैं अपनी नानी से बार-बार चीनी मांगती थी, वो मना कर देतीं तो मैं कहती नमक ही दे दो। चश्मे बद्दूर, दामुल जैसी दो विपरीत नेचर वाली फिल्मों पर बात छिड़ी तो कहने लगीं कि यह तो कलाकार के लिए जरूरी है कि वह हर किरदार में खुद को ढाल ले।
प्रेम का आदर्श तो अमृता व इमरोज
जिक्र आया ‘एक मुलाकात’ नाम के नाटक का, जो अमृता प्रीतम व साहिर लुधियानवी को लेकर था। इस पर दीप्ति कहती हैं कि मेरे लिए प्रेम का आदर्श अमृता व इमरोज थे। मेरे हिसाब से रिश्ते ऐसे ही होनी चाहिए। यादों में खोते हुए वे अमृता जी के साथ बिताए पलों को दोहराती चली गईं। बोलीं, हमारी अच्छी बनती थी। उनसे मुझे बासु भट्टाचार्य ने मिलवाया था। हम लोग इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दौरान सिरी फोर्ट में थे। वे मुझे अमृता जी से मिलवाने दिल्ली ले गए। वहां बासु दा ने कहा कि ये लड़की है तो न्यूयार्क से, पर अच्छी खासी उर्दू आईज्ड हिंदुस्तानी कविताएं लिखती है। उन्होंने ही एक प्रकाशक को फोन किया, कहा कि इसे छापो।
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21 साल पहले शुरू किया था लिखना
किताबें लिखने को लेकर उन्होंने कहा कि 21 साल पहले लिखना शुरू किया था। चार चैप्टर लिखे थे। उसी वक्त लगा कि अभी रिसर्च करना होगा, काफी सूचनाएं जुटानी होंगी। प्रक्रिया शुरू हुई, यादों से यादें टकराने लगीं। इसे पूरा करने में महामारी के काल का बहुत बड़ा रोल है।
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