सम्मान समारोह में पहुंचे विद्यार्थी।
लखनऊ। किताबों में पढ़ते थे और माता-पिता से सुनते थे कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ है, लेकिन कैसा है, यह आज मालूम हुआ। कई बार फिल्मों और तस्वीरों में भी यहां के नजारे देखे थे, मगर इस शहर में आकर जो सुंदरता देखी है, उसका एहसास अलग ही है। यह कहना है अमर उजाला मेधावी सम्मान समारोह में पहुंचे मेधावियों का, जो राजधानी की बस यात्रा के दौरान नवाबों के शहर से रूबरू हो रहे थे, शहर को अपनी आंखों में कैद कर रहे थे। सभी ने अभिभावकों के साथ विधान भवन, लोक भवन, रिवर फ्रंट, 1090 चौराहा, आंबेडकर पार्क की तस्वीरें भी खींचीं। इस अद्भुत सफर ने प्रदेश के दूरदराज के इलाकों से पहुंचे इन मेधावियों के मन को प्रफुल्लित कर दिया। लोकभवन से लेकर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान तक की यह यात्रा उनके लिए यादगार बन गई।
छात्रों ने आपसी संवाद में राजधानी लखनऊ को तस्वीरों और फिल्मों से भी खूबसूरत बताया। उन्होंने 1090 पर पहुंचकर तस्वीरें खिंचवाई तो मरीन ड्राइव से आंबेडकर पार्क के नजारे देखे। गोमती किनारे बने रिवर फ्रंट को देखकर उनमें अलग उत्साह और ऊर्जा नजर आ रही थी।
हमीरपुर जिले के दीपांशु कौशिक ने बताया कि इससे पहले उन्होंने सिर्फ तस्वीरों में ही विधानसभा देखी थी, लखनऊ पहुंचकर उसे न सिर्फ करीब से देखा, बल्कि मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की। इसी तरह से अयोध्या की कशफ फातिमा ने मरीन ड्राइव और 1090 चौराहे की सुंदरता को आंखों में बसाने वाला बताया। प्रतापगढ़ की पलक श्रीवास्तव ने कहा कि वह पहली बार लखनऊ आई हैं। इतना सुंदर शहर उन्होंने पहली बार देखा।
सुल्तानपुर निवासी मेधावी पूजा देवी ने बताया कि वह पहले लखनऊ कभी नहीं आईं। लोक भवन को देखकर अंदर से खुशी मिली। यदि बेहतर तैयारी होगी तो एक न दिन यहां तक पहुंचने की राह आसान होगी।
मऊ निवासी विद्यांशु शर्मा ने बताया कि राजधानी की धरोहरें, प्रशासनिक भवन, सड़क व अन्य वस्तुओं को करीब से देखा। 1090 व आसपास फोटो खिंचवाईं। यहां के लोग सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं, यही वजह है कि भवन से लेकर सड़कें शीशे की तरह चमक रही है। अमरोहा निवासी जिज्ञासा ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास और 1090 चौराहा को करीब से देखा है। यहां बने पिंक बूथ को पहली बार देखा। इसके बारे में जानकारी ली गई तो मुझे बताया गया कि इसकी उपयोगिता महिला सुरक्षा के लिए उपयोगी है।
बरेली की डिंपल मौर्या ऊंची-ऊंची इमारतें देखकर हैरान थीं। वह अपने पिता से कह रही थीं कि पापा, वह इमारत कितनी ऊंची है। कितना समय लगा होगा इसे बनाने में। अपने पिता से बापू भवन से लेकर 1090 पर लगी ब्रह्मोस मिसाइल और रास्ते में दिखने वाले हर नजारे के बारे में पूछ रही थीं। वहीं, बाराबंकी की छात्रा कलश को शहर स्वच्छता आकर्षित कर रही थी। साथ ही, औरैया की चांदनी राठौर को पिंक बूथ काफी अच्छा लगा। उन्होंने यह पहली बार देखा था। वह कह रही थीं कि हर जिले में पिंक बूथ हो जाए तो कितना अच्छा हो जाए। महिलाओं को बाहर निकलने में डर नहीं लगेगा।