फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: मैंने तीरंदाजी को नहीं, तीरंदाजी ने मुझे चुना

विज्ञापन
पैरा तीरंदाज शीतल देवी।
विज्ञापन
लखनऊ। गर्दन, कंधे और पैरों की मदद से तीरंदाजी में पैरालंपिक का कांस्य पदक जीतने वाली शीतल देवी आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। दुनिया की एकमात्र बिना हाथों वाली तीरंदाज ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प की बदौलत खेलों की दुनिया में अहम मुकाम बनाया। लखनऊ में शुरू हुई राष्ट्रीय महिला तीरंदाजी प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में उन्हें पैरालंपिक और पैरा एशियन गेम्स में किए शानदार प्रदर्शन के लिए खासतौर पर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन


युवा तीरंदाज ने कहा कि अगर कुछ करने की चाह हो तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती है। जब मुझे खेलों में हाथ आजमाने को बोला गया तो तीन विकल्प (दौड़, तैराकी और तीरंदाजी) दिए गए। इसमें तीरंदाजी ने मेरा सबसे अधिक ध्यान खींचा। अगर मैं यह बोलूं कि मैंने तीरंदाजी का चयन नहीं किया, बल्कि तीरंदाजी ने मुझे चुना तो यह गलत नहीं होगा। शुरुआत में काफी दिक्कतें आती थीं। अभ्यास सत्र के दौरान पैरों में काफी दर्द रहता था। लंबे अभ्यास के बाद मैंने पैरों के सहारे से धनुष को साधना और निशाना लगाना सीख लिया। कड़े परिश्रम के बाद आज परिणाम सबके सामने है।

सामान्य वर्ग में अपनी अलग पहचान बनाने की इच्छा रखने वाली शीतल कहती हैं देश के लिए सामान्य वर्ग में खेलकर ओलंपिक में पदक जीतना मेरा सपना है। इसके लिए कड़ी तैयारी कर रही हूं। फिलहाल मेरा लक्ष्य पैरा एशियाई खेलों के साथ एशियाई खेलों में खेलना है ताकि वहां पदक जीतकर ओलंपिक खेलने के सपने के करीब पहुंच सकूं। पैरा खिलाड़ियों को संदेश देते हुए शीतल ने कहा कि मेरा सभी पैरा खिलाड़ियों से बस इतना ही कहना है कि वे कभी खुद को कमजोर न समझें। मेरे विचार में वह सामान्य हो अथवा पैरा खिलाड़ी हो, किसी में कोई कमी नहीं होती है। उसे आगे बढ़ने के लिए सिर्फ मेहनत की जरूरत होती है, जिसकी बदौलत वह अपना मुकाम हासिल कर सके।

पैरा तीरंदाज शीतल देवी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें