लखनऊ। अम्मी ने अपनी जान से पहले मेरी फिक्र करते हुए मुझे न बचाया होता तो शायद आज वह जिंदा होतीं। मदद के लिए उनकी चीख-पुकार अब भी सुनाई दे रही है। सबकुछ देखते ही देखते राख हो गया...
मां निदा रिजवी को याद कर जारा बिलख पड़ीं। उनका दर्द आंसू बनकर सामने आ रहा था। फूट-फूटकर रो रहीं जारा को रिश्तेदार संभालने की कोशिश तो कर रहे थे, पर वह बदहवास थीं।
यूएस से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही जारा की सोमवार शाम फ्लाइट थी। जारा ने बताया कि 22 रजब त्योहार को लेकर रविवार से ही सब खुश थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ये खुशियां गम में बदल जाएंगी।
रविंद्रपल्ली स्थित रोहतास एन्क्लेव के फ्लैट में रहने वाली निदा सुबह से त्योहार की तैयारियों में जुटी थीं, जबकि जारा यूएस जाने के लिए पैकिंग कर रही थीं। इसी बीच आग लग गई और सबकुछ राख हो गया। जारा ने बताया कि अब्बू ने अम्मी को बचाने की काफी कोशिश की, पर लपटों के आगे वह कुछ कर न सके। अम्मी ने आखों के सामने दम तोड़ दिया और हम सब बेबस रह गए।
पूर्व सीएम ने निदा को किया था सम्मानित
रिश्ते में भाई सुजात ने बताया कि निदा कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी थीं। उनके सामाजिक कार्यों के लिए 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें सम्मानित भी किया था। निदा नेक दिल और खुशमिजाज थीं। वह अकसर परिवार के साथ पहाड़ों में घूमने जाती थीं।
राख होने से बच गए 11 लाख रुपये, जेवर
दमकलकर्मियों को आग बुझाने के दौरान एक लॉकर में 11 लाख रुपये व लाखों के जेवर मिले। पुलिस ने इन्हें सुरक्षित निकालकर निदा के पड़ोसी अमित रावत को दे दिया। उधर, परिजनों ने बताया कि मो. अम्मार की हालत खराब है। वह बार-बार पत्नी निदा के बारे में पूछ रहे हैं।
एक नजर में घटनाक्रम
7:00 बजे सुबह निदा जलती मोमबत्ती रखकर पिता के फ्लैट में गईं।
7:15 दोबारा फ्लैट में पहुंचने पर दिखीं आग की लपटें।
7:30 बजे मो. अम्मार बेटी को लेकर फ्लैट से बाहर आए।
7:35 बजे डर के कारण निदा फ्लैट की बालकनी से कूदीं।
7:35 बजे दमकल पांच गाड़ियों के साथ घटनास्थल पर पहुंची।
9:35 बजे दमकल ने आग पर पूरी तरह से पाया काबू।
निदा के पति सैय्यद मोहम्मद अम्मार बेटी जारा को बचाने में झुलस गए। वहीं, बेटा जोहराब पिछले कमरे से बाहर निकल गया।