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Lucknow News: हाइड्रोजेल... पानी का नया पहरेदार

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बीबीएयू की एसोसिएट प्रोफेसर लैब में अपनी शोध छात्राओं की टीम के साथ। स्वयं
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अभिषेक सहज
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लखनऊ। आमजन को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने की चुनौतियों के बीच बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ज्योति पांडेय और उनकी टीम ने एक ऐसी पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजेल तैयार किया है जो पानी से आर्सेनिक जैसे हानिकारक तत्वों को हटाने में मददगार साबित होगा। उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूपीसीएसटी) की ओर से शोध परियोजना पर काम करते हुए उन्होंने इस पदार्थ को विकसित किया है।
डॉ. ज्योति पांडेय ने बताया कि परियोजना के तहत प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त पदार्थों का उपयोग कर एक विशेष हाइड्रोजेल तैयार किया गया। यह हाइड्रोजेल पानी में मौजूद आर्सेनिक जैसे विषैले तत्वों को आकर्षित कर उन्हें हटाने की क्षमता रखता है। यह जहरीले रंजक और कार्बनिक प्रदूषकों को हटाने में भी प्रभावी है। शोधकर्ताओं ने विभिन्न वैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से इसकी गुणवत्ता और मजबूती की पुष्टि की।
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यह हाइड्रोजेल का विश्लेषण एफटी-आईआर, एक्सआरडी, एसईएम तथा टीजीए तकनीकों से किया गया। इन विश्लेषणों ने गैलेक्टोमेनन के सफल संशोधन की पुष्टि की। इससे एक स्थिर और सुसंगठित त्रि-आयामी जाल संरचना का निर्माण हुआ। इस सामग्री में पर्याप्त यांत्रिक मजबूती और तापीय स्थिरता भी पाई गई। ये गुण इसे जलीय माध्यम में उपयोग के लिए उपयुक्त बनाते हैं। डॉ. ज्योति ने बताया कि यह सामग्री पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ और कम लागत वाली है। भविष्य में इसका उपयोग जल शोधन तकनीकों में किया जा सकता है जिससे लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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तीन साल के लिए मिली 8.92 लाख की ग्रांट
उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूपीसीएसटी) की ओर से शोध परियोजना पर काम के दौरान डॉ. ज्योति पांडेय को तीन साल के लिए 8.92 लाख रुपये की ग्रांट मिली। उन्होंने इससे पहले नैनो उत्प्रेरक भी बनाए थे। इनका उपयोग जीव विज्ञान के महत्वपूर्ण यौगिकों के संश्लेषण में हुआ। इन परिणामों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया। इनमें कार्बनिक एवं जैव-आणविक रसायन विज्ञान तथा जैविक वृहद-अणुओं की अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका प्रमुख हैं।
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