विधानभवन और राजभवन कॉलोनी सहित सरकार की 70 प्रमुख इमारतें नगर निगम की कर्जदार हैं। प्रदेश सरकार की इन बिल्डिंगों पर हाउस टैक्स के 42 करोड़ रुपये बकाया हैं। बिल्डिंगें सरकारी होने के कारण इन पर सख्त कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है।
बकाया भी एक साल का नहीं कई-कई साल का है। सरकारी इमारतों का टैक्स राज्य सम्पत्ति विभाग जमा करता है। इसको लेकर उसको बकाया की पूरी सूची भी भेज दी गई है। पहले भी नगर निगम की ओर से बकाया टैक्स जमा करने को लेकर राज्य सम्पत्ति को बिल भेजे जा चुके हैं।
नगर निगम में इस समय वित्तीय संकट गहराया हुआ है। वेतन और पेंशन के भी लाले हैं। वहीं प्रदेश सरकार की बिल्डिंगों का टैक्स जिम्मेदार विभाग अदा नहीं कर रहे हैं। सिर्फ जोन एक में ही सरकारी इमारतों पर 42 करोड़ रुपये हाउस टैक्स बकाया है।
राज्य सम्पत्ति विभाग के अधिकार में आने वाली सबसे अधिक इमारतें जोन एक में ही हैं। इसके अलावा अन्य जोनों में भी मंत्री आवास और कर्मचारियों की कॉलोनियां हैं। वह भी राज्य सम्पत्ति के दायरे में आती हैं।