विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित
विधानसभा अध्यक्ष ने सदन के स्थगित होने की घोषणा करने के पहले सदस्यों से अच्छी परंपराएं स्थापित करने का आह्वान किया। विधानसभा अध्यक्ष ने शीतकालीन सत्र को काफी उपयोगी बताते हुए सत्ता पक्ष व विपक्ष के सदस्यों व सरकार के मंत्रियों की सराहना की।
साथ ही सदन में अच्छी न लगने वाली परंपराएं खत्म कर अच्छी परंपराएं स्थापित करने का आह्वान किया। अध्यक्ष ने सदस्यों को याद दिलाया कि हम चुनाव में मतदाता से वोट के लिए हाथ जोड़ते हैं, पैर पकड़ते हैं तब यहां आ पाते हैं। ‘माननीय’ कहे जाते हैं।
जनता को सेवा का भरोसा देकर आते हैं। उन्होंने कहा कि पद आते-जाते रहते हैं। कब गया, पता नहीं चलता। ऐसे में अगली बार जब सदन में आएं तो ऐसी परंपराएं शुरू करें जो अच्छी हों, अनुकरणीय बनें।
सत्र के दौरान सदन के भीतर होहल्ला व वेल में आने वाली घटनाओं से काफी व्यथित नजर आ रहे विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि होली रंग का, प्रीति का, प्रकृति से जुड़ाव का उत्सव है। लेकिन होली के साथ दारू कब जुड़ गया, पता नहीं चलता।
उन्होंने कहा कि होली के साथ दारू जुड़ने को अच्छी परंपरा तो नहीं कह सकते। इसी तरह सदन के भीतर जो अच्छा नहीं लगता है उसे इस आधार पर आगे बढ़ाना ठीक नहीं है कि ऐसा पहले से हो रहा था। उन्होंने कहा कि अगले सदन में हम सभी आएं तो कई नई परंपरा डालें।