इंडस्ट्री पार्टनर तय न हो पाने की वजह से राजधानी में बनने वाले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (ट्रिपल आईटी) की गाड़ी अटकी हुई है।
जानी-मानी आईटी कंपनी एचपी ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की इच्छा तो जताई है लेकिन अधिकारी अभी यह तय नहीं कर पाए हैं कि इंडस्ट्री पार्टनर एचपी को बनाएं या फिर इसमें कुछ और कंपनियों को जोड़ा जाए।
यूं तो सरकार ने कुछ दिनों पहले ही इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी उपक्रम यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड को इंडस्ट्री पार्टनर बनाया था।
केंद्र सरकार ने 2013 में ही लखनऊ में ट्रिपल आईटी प्रोजेक्ट को अपनी मंजूरी दी थी बाद में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इसे अपनी प्राथमिकता में शामिल कर लिया था। इसमें 50 फीसदी धन केंद्र सरकार, 35 प्रतिशत प्रदेश सरकार व 15 फीसदी धन राज्य के इंडस्ट्री पार्टनर को लगाना है।
128 करोड़ रुपये के इस काम में 64 करोड़ केंद्र, 44.8 करोड़ राज्य व 19.2 करोड़ रुपये इंडस्ट्री पार्टनर को लगाने हैं।
चूंकि इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में प्रदेश सरकार ने अपने उपक्रम यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन को चुना था, इसलिए 15 फीसदी धन भी प्रदेश सरकार को ही खर्च करना होगा। ऐसे में केंद्र सरकार ने सुझाव दिया है कि इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में आईटी की किसी कंपनी को शामिल करने से प्रदेश सरकार पर आर्थिक बोझ कम पड़ेगा।
इसी के बाद प्रदेश सरकार ने भी इसमें अन्य आईटी कंपनियों को शामिल करने का मन बना लिया है। लेकिन पार्टनर बिड के जरिये चुने जाएं या फिर किसी अन्य तरीके से, यह अभी साफ नहीं हो सका है।
वहीं, लैपटॉप बांटने वाली आईटी कंपनी एचपी ने कुछ दिनों पहले इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की इच्छा जताई है। उसने एक पत्र भी सरकार के पास भेजा है। हालांकि, उसने यह साफ नहीं किया है कि वह इस प्रोजेक्ट के लिए कितना पैसा लगाने को तैयार है।
अब सरकार के सामने दिक्कत यह है कि इंडस्ट्री पार्टनर बिड के जरिये चुने जाएं या फिर सीधे एचपी को ही इसमें शामिल कर लिया जाए। यदि बिड के द्वारा इंडस्ट्री पार्टनर चुने जाते हैं तो इस प्रोजेक्ट में विलंब होना तय है।
बिड प्रक्रिया में समय लगेगा और तब तक चुनाव आचार संहिता लग जाएगी। स्थिति साफ न होने से प्रदेश सरकार ट्रिपल आईटी के लिए एमओयू नहीं कर पा रही है।