लखनऊ। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनकी नसबंदी की हकीकत बयां करने वाली पशु गणना की रिपोर्ट एक महीने में सार्वजनिक हो जाएगी। नगर निगम और नसबंदी करने वाली संस्था एचएसआई ने गणना पूरी कर ली है, जिसका वर्तमान में परीक्षण चल रहा है।
नगर निगम के मुख्य पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा के अनुसार, राजधानी में आवारा कुत्तों की अनुमानित आबादी इस समय 1.50 लाख से अधिक है। वर्ष 2019 से चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक करीब 1,00,234 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। नई रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो जाएगा कि वर्तमान में कितने कुत्ते बिना नसबंदी के सड़कों पर घूम रहे हैं।
इस तरह होती है गणना
कुत्तों की गणना चुनाव के एग्जिट पोल की तर्ज पर की जाती है। डॉ. वर्मा ने बताया कि मानक के अनुसार, किसी भी शहर की कुल आबादी का करीब तीन प्रतिशत कुत्तों की संख्या मानी जाती है। लखनऊ की मौजूदा आबादी 40 से 45 लाख के बीच है, इसी आधार पर सैंपल सर्वे किया गया है। नसबंदी की पहचान के लिए मादा कुत्तों के कान पर ''वी'' कट लगाया जाता है और नर कुत्तों के शारीरिक अंगों से इसकी पुष्टि की जाती है।
नसबंदी न होती तो संख्या होती 3.50 लाख
पशु कल्याण अधिकारी ने दावा किया कि यदि 2019 से नसबंदी का सघन अभियान न चलता, तो आज शहर में कुत्तों की संख्या 3.50 लाख के करीब होती। जब अभियान शुरू हुआ था, तब शहर में करीब 70 हजार कुत्ते थे। मादा कुत्ता साल में दो बार प्रजनन करती है और एक बार में औसतन 6 बच्चों को जन्म देती है। हालांकि, इनमें से आधे जीवित नहीं रह पाते, फिर भी आबादी तेजी से बढ़ती है।