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UP News: सहायता प्राप्त स्कूलों में डेढ़ रुपये में सालभर कैसे चलें पंखे? सुविधाओं के अभाव में घट रहा नामांकन

Mon, 22 Jun 2026 01:53 PM IST
Bhupendra Singh रविशंकर गुप्ता, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

यूपी में सहायता प्राप्त स्कूलों में डेढ़ रुपये में सालभर कैसे पंखे चलें? 16 साल से शुल्क नहीं बढ़ा। सुविधाओं के अभाव में नामांकन घट रहा है, आर्थिक संकट बढ़ रहा है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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एडेड स्कूल (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महंगाई के इस दौर में यूपी में सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी कई मदों में छात्रों से वही शुल्क लिया जा रहा है जो करीब 16 वर्ष पहले तय किया गया था। विकास शुल्क दो रुपये, पंखा शुल्क डेढ़ रुपये और कला शुल्क 1.20 रुपये जैसे शुल्कों के सहारे कॉलेजों को अपने संसाधनों का संचालन करना पड़ रहा है। ऐसे में अधिकांश सहायता प्राप्त कॉलेज आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
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कॉलेज प्रबंधकों का कहना है कि इतने सीमित शुल्क से न तो आधारभूत सुविधाओं का विस्तार संभव है और न ही मौजूदा व्यवस्थाओं का समुचित रखरखाव। कई स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं तक का संकट है। कहीं भवन जर्जर हैं तो कहीं बिजली बिल का भुगतान भी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है।

वर्तमान शुल्क संरचना पिछले 16 से लागू है

सुविधाओं की कमी का सीधा असर नामांकन पर भी पड़ रहा है। अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्र संख्या लगातार घट रही है। वर्षों से लागू है। महंगाई में लगातार वर्तमान शुल्क संरचना पिछले 16 से लागू है, महंगाई में वृद्धि हुई, लेकिन कॉलेजों के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर माध्यमिक शिक्षा परिषद 2010 में यूपी बोर्ड की फॉर्म फीस की फीस में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 60 रुपये थी, जो बढ़कर अब 600 रुपये तक पहुंच गई है।
 
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सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू फीस। - फोटो : अमर उजाला

पिछले वर्ष शुल्क बढ़ाने की उठी थी मांग

सहायता प्राप्त प्रबंधक महासभा के अनुसार, पिछले वर्ष मुख्यमंत्री योगी ज्ञापन देकर शुल्क बढ़ाने की मांग कहना है कि उनकी की गई थी। महासभा का मांग शुल्क को कम से कम दोगुना करने की थी। उनका तर्क है कि दोगुना शुल्क होने पर भी यह महंगाई की तुलना में काफी कम रहेगा, लेकिन इससे कॉलेजों को कुछ राहत अवश्य मिल सकती है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इन 16 वर्षों में अपना शुल्क तो 10 गुना बढ़ा लिया है, लेकिन एडेड कॉलेजों को शुल्क बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई। आज हालत ये है कि सरकार की अलंकार योजना में हम आवेदन भी करना चाहें तो हमारे पास 25 प्रतिशत बजट नहीं है। -अरविंद कुमार, कार्यकारी अध्यक्ष, अशासकीय सहायता प्राप्त प्रबंधक महासभा

पूर्व में इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, अभी प्रक्रिया पाइपलाइन में है।  -डॉ. महेंद्र देव, पूर्व निदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग
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